टेस्ट में वैभव पर पनेसर की बड़ी भविष्यवाणी
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का नाम तेजी से चर्चा में आया है। महज 15 साल की उम्र में टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट तक पहुंच चुके सूर्यवंशी ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से कम समय में खास पहचान बनाई है। हालांकि, अब उनके टेस्ट क्रिकेट में भविष्य को लेकर क्रिकेट जगत में अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।
इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज स्पिनर मोंटी पनेसर ने सूर्यवंशी के टेस्ट करियर को लेकर अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि मौजूदा समय में इस युवा बल्लेबाज के पास टेस्ट क्रिकेट में सफल होने के लिए जरूरी तकनीकी मजबूती नहीं दिखती। पनेसर ने यह बात ‘बियोंड23 क्रिकेट’ पॉडकास्ट में कही, जहां उनके साथ इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क भी मौजूद थे।
पनेसर ने सूर्यवंशी के सीमित ओवरों के प्रदर्शन और फर्स्ट क्लास क्रिकेट के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें फिलहाल नहीं लगता कि युवा बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट में जगह बना पाएंगे। उनके मुताबिक सूर्यवंशी की बल्लेबाजी में आक्रामकता और ताकत जरूर है, लेकिन सबसे लंबे प्रारूप में तकनीक की अपनी अलग अहमियत होती है।
पनेसर ने क्यों उठाया टेस्ट तकनीक पर सवाल?
सूर्यवंशी ने टी20 क्रिकेट में अब तक 42.82 की औसत और 216.32 के स्ट्राइक रेट से 1670 रन बनाए हैं। दूसरी ओर, फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनके नाम 17 पारियों में 23.47 की औसत से 399 रन हैं।
पनेसर ने कहा कि मौजूदा समय में उन्हें सूर्यवंशी की तकनीक टेस्ट क्रिकेट के स्तर के लिए पर्याप्त नहीं लगती। उन्होंने यह भी उदाहरण दिया कि फिलहाल हैरी ब्रूक उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने टेस्ट और टी20 इंटरनेशनल दोनों में ऊंचा स्तर बनाए रखा है।
हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क ने पनेसर की राय से अलग नजरिया रखा। क्लार्क का मानना है कि अगर किसी खिलाड़ी में पर्याप्त कौशल और प्रतिभा हो तो वह तीनों फॉर्मेट में सफल हो सकता है।
क्लार्क ने दिया विराट और एबी डिविलियर्स का उदाहरण
क्लार्क ने विराट कोहली और एबी डिविलियर्स का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने टेस्ट और टी20 क्रिकेट में अपनी क्षमता साबित की थी। उनके मुताबिक सूर्यवंशी भी भविष्य में ऐसा कर सकते हैं और उन्हें अभी से किसी एक प्रारूप तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
क्लार्क ने सूर्यवंशी की सबसे बड़ी ताकत उनकी पावर और गेंद को जल्दी पहचानने की क्षमता को बताया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे युवा बल्लेबाज भारत के अलग-अलग हिस्सों में खेलेगा और विभिन्न परिस्थितियों में अभ्यास करेगा, उसकी तकनीक में भी सुधार हो सकता है।
माइकल क्लार्क के मुताबिक सूर्यवंशी में प्रतिभा की कमी नहीं है और समय के साथ उनका खेल और विकसित हो सकता है। ऐसे में पनेसर की तकनीक वाली चिंता के उलट क्लार्क ने उनके तीनों फॉर्मेट में भविष्य की संभावनाओं को खुला रखा है।
फिलहाल सूर्यवंशी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह टी20 की आक्रामक शैली के साथ-साथ लंबे प्रारूप की जरूरतों के मुताबिक अपने खेल में कितना बदलाव कर पाते हैं। टेस्ट क्रिकेट में धैर्य, डिफेंस और परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी की परीक्षा अलग तरह से होती है।