कब्जे वाले इलाकों में रूस का चुनाव, बढ़ा विवाद
मॉस्को। रूस में 18 से 20 सितंबर तक स्टेट ड्यूमा यानी संसद के निचले सदन के चुनाव चल रहे हैं। इस बार मतदान को लेकर सबसे बड़ा विवाद यूक्रेन के उन हिस्सों में वोटिंग कराने को लेकर है, जिन पर रूस का कब्जा है। डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिजिया के कब्जे वाले हिस्सों में भी रूसी संसदीय चुनाव के लिए मतदान कराया जा रहा है।
यह पहली बार है जब 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर यूक्रेन पर आक्रमण शुरू होने के बाद इन चार क्षेत्रों के कब्जे वाले हिस्सों के निवासियों को रूसी संसदीय चुनाव में शामिल किया गया है। रूस इन क्षेत्रों को अपने राजनीतिक और संवैधानिक ढांचे में शामिल करने की कोशिश कर रहा है, जबकि यूक्रेन और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इन क्षेत्रों को यूक्रेन का हिस्सा मानती हैं।
कीव ने चुनाव को बताया अवैध
यूक्रेन ने रूस की इस चुनाव प्रक्रिया को खारिज कर दिया है। कीव का कहना है कि कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्र में रूस की ओर से कराए जा रहे चुनावों का कोई वैध आधार नहीं है और इनके नतीजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। यूक्रेनी संसद ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे परिणामों को स्वीकार नहीं करने की अपील की है।
अंतरराष्ट्रीय चुनाव व्यवस्था पर काम करने वाली संस्था International IDEA ने भी कहा है कि किसी दूसरे देश के कब्जे वाले क्षेत्र में कब्जा करने वाले देश की संसद के लिए चुनाव कराना अंतरराष्ट्रीय कानून और यूक्रेन की संप्रभुता से जुड़ी गंभीर समस्या पैदा करता है।
मतदान के तरीके पर भी उठे सवाल
यूक्रेनी अधिकारियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कब्जे वाले क्षेत्रों में मतदान की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ इलाकों में मोबाइल मतदान दल घरों तक पहुंचे और उनके साथ रूसी सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी की बात सामने आई है। यूक्रेनी पक्ष ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों पर मतदान के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इन आरोपों को रूस की ओर से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।
यूक्रेन ने यह भी चेतावनी दी है कि कब्जे वाले क्षेत्रों में चुनाव के आयोजन में सहयोग करने वाले लोगों पर उसके कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। कीव ने अपने नागरिकों से मतदान प्रक्रिया से दूर रहने की अपील भी की है।
पुतिन ने चुनाव को बताया एकता का प्रतीक
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इन क्षेत्रों के लोगों के रूसी संसदीय चुनाव में शामिल होने को महत्वपूर्ण बताया है। रूसी पक्ष इसे देश की एकता और इन क्षेत्रों को रूस के साथ जोड़ने की अपनी नीति के संदर्भ में पेश कर रहा है।
रूस का कहना है कि इन इलाकों में रहने वाले लोगों को भी रूसी राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार है। दूसरी ओर, यूक्रेन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं रूस के इन क्षेत्रीय दावों को स्वीकार नहीं करतीं और चुनावों को लेकर अलग रुख रखती हैं।
यूरोपीय संघ ने भी जताया विरोध
यूरोपीय संघ ने कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में रूस की ओर से कराए जा रहे चुनावों को स्वीकार नहीं करने की बात दोहराई है। International IDEA और IFES जैसी संस्थाओं ने भी इन क्षेत्रों में रूसी चुनाव कराने की आलोचना की है। IFES ने कहा कि कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्र में रूसी स्टेट ड्यूमा चुनाव आयोजित करना यूक्रेन की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़ी गंभीर आपत्तियां खड़ी करता है।
इस विवाद के बीच रूस में संसदीय मतदान 20 सितंबर को समाप्त होगा। इसके बाद आने वाले परिणामों को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता का सवाल प्रमुख बना रहेगा। यूक्रेन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह कब्जे वाले क्षेत्रों में कराए गए इस मतदान या उसके परिणामों को वैध नहीं मानता।