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सरकारी कार्यक्रमों में अब वंदे मातरम का नया प्रोटोकॉल, कौन-कब और कैसे गाएगा तय

सरकारी कार्यक्रमों में अब वंदे मातरम का नया प्रोटोकॉल, कौन-कब और कैसे गाएगा तय

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को वंदे मातरम के लिए विस्तृत प्रोटोकॉल जारी किया, जिसका उद्देश्य सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत की औपचारिक भूमिका स्पष्ट करना है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, वंदे मातरम का संपूर्ण संस्करण, जिसमें छह श्लोक हैं और लगभग 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगता है, प्रमुख राजकीय समारोहों में प्रस्तुत किया जाएगा।

इनमें राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अवसर, राष्ट्रपति और राज्यपाल के आधिकारिक आगमन और प्रस्थान समारोह, तथा उनके निर्धारित भाषणों से पहले या बाद के कार्यक्रम शामिल हैं। यदि किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम और राष्ट्रगान दोनों हों, तो पहले वंदे मातरम और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। दर्शकों से अपेक्षा है कि वे दोनों प्रदर्शन के दौरान सम्मान के प्रतीक के रूप में खड़े रहें।

शिक्षण संस्थानों के लिए भी गृह मंत्रालय ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। छात्रों को दैनिक सभा और महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में वंदे मातरम गाने के लिए प्रेरित करने का लक्ष्य यह है कि युवा पीढ़ी और आम जनता में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़े।

औपचारिक शुरुआत सुनिश्चित करने के लिए, यदि वंदे मातरम किसी बैंड द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है, तो ढोल या बिगुल की ध्वनि से गायन की शुरुआत का संकेत देना होगा। हालांकि, सिनेमा हॉल या फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान दर्शकों को खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी, ताकि मनोरंजन अनुभव बाधित न हो और भ्रम पैदा न हो।

गृह मंत्रालय इस कदम से राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के औपचारिक प्रोटोकॉल में समानता लाने की संभावना भी देख रहा है। अभी तक इस संबंध में कोई कानूनी संशोधन या अंतिम वैधानिक नियम लागू नहीं किया गया है।

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