सोशल मीडिया की दौड़ में खो रहे युवा? कृति खरबंदा ने जताई चिंता
मुंबई। अभिनेत्री कृति खरबंदा ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उसके कारण युवाओं पर पड़ रहे मानसिक दबाव को लेकर अपनी चिंता साझा की है। उन्होंने कहा कि आज की डिजिटल दुनिया में कई युवा लगातार ऑनलाइन सक्रिय रहने और खुद को बेहतर दिखाने की होड़ में फंसते जा रहे हैं, जिसका असर उनकी मानसिक शांति पर पड़ रहा है।
कृति ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक संदेश में बताया कि हाल ही में उनकी मुलाकात कुछ ऐसे युवाओं से हुई, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत कर रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया की अपेक्षाओं और दबाव से परेशान हैं। उनके अनुसार, कई युवा मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से थकान महसूस कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगातार अपनी मौजूदगी ऑनलाइन बनाए रखने की चिंता रहती है।
अभिनेत्री ने कहा कि आज की पीढ़ी अनजाने में अपनी तुलना दूसरों से करने लगी है। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली जिंदगी को वास्तविकता मानकर लोग खुद पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं। कई युवा अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक नहीं करना चाहते, लेकिन उन्हें डर रहता है कि ऐसा करने पर वे लोगों की नजरों में कम महत्वपूर्ण या कम आकर्षक लग सकते हैं।
कृति का मानना है कि सोशल मीडिया किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि यह उसका केवल एक छोटा हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि बिना सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहे भी एक संतुलित, खुशहाल और सुकूनभरी जिंदगी जी जा सकती है।
उन्होंने युवाओं से अपनी मानसिक शांति और व्यक्तिगत जीवन को प्राथमिकता देने की अपील की। कृति ने कहा कि हर व्यक्ति को यह अधिकार होना चाहिए कि वह अपनी निजी बातें साझा करे या न करे, और किसी की पहचान या महत्व का आकलन उसके सोशल मीडिया फॉलोअर्स या पोस्ट के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
अभिनेत्री ने उम्मीद जताई कि समाज धीरे-धीरे इस सोच को स्वीकार करेगा कि निजी जीवन को निजी रखना पूरी तरह सामान्य है और लोगों की असली पहचान उनकी वास्तविक उपलब्धियों और व्यक्तित्व से तय होती है, न कि उनकी ऑनलाइन मौजूदगी से।