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‘पुलिस मित्र’ के नाम पर ठगी : 42 युवाओं से लाखों की वसूली

‘पुलिस मित्र’ के नाम पर ठगी : 42 युवाओं से लाखों की वसूली

पूर्वी चंपारण। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में ‘पुलिस मित्र’ की नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवकों से ठगी करने का बड़ा मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को प्रभावशाली बताकर जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के करीब 42 युवाओं से लाखों रुपये वसूल लिए।

इस ठगी का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पूरा खेल पुलिस थानों के आसपास और थाना परिसरों में चलता रहा, लेकिन लंबे समय तक किसी अधिकारी को इसकी भनक नहीं लगी। मामला उजागर होने के बाद एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर कोटवा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और जांच शुरू कर दी गई है।

पीड़ित रवि कुमार यादव ने बताया कि जून 2025 में कुछ युवक उनके पास पहुंचे और पुलिस मित्र की नौकरी व जिला कोऑर्डिनेटर का पद दिलाने का लालच देकर उनसे चार लाख रुपये ले लिए। आरोपियों ने उन्हें आई-कार्ड देकर कोटवा में जॉइनिंग भी कराई और अन्य युवाओं को जोड़ने के लिए कहा।

ठगों ने युवकों को भरोसे में लेने के लिए डीजीपी के नाम से जारी एक कथित पत्र भी दिखाया, जिस पर रिसीविंग होने का दावा किया गया था। साथ ही, हर महीने 16 हजार रुपये वेतन मिलने का वादा किया गया। कई युवाओं को अलग-अलग थानों में पुलिस मित्र बनाकर बैठाया गया।

मिली जानकारी के अनुसार, इस नेटवर्क का दायरा अरेराज, घोड़ासहन, पलनवा और गोविंदगंज तक फैला हुआ था। कुछ पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में कुछ स्थानीय स्तर के लोगों की भूमिका भी संदिग्ध रही है।

पैसे लेने के बाद ठग कई महीनों तक युवाओं को वेतन शुरू होने का आश्वासन देते रहे। कभी बैंक पासबुक मंगाई जाती, तो कभी होटल में बैठक बुलाकर नए बहाने बनाए जाते। बाद में गिरोह का मास्टरमाइंड अचानक गायब हो गया, जिसके बाद पीड़ितों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि प्रशिक्षु आईपीएस हेमंत सिंह के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है। टीम पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।

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