Dark Mode
सरकार की कमाई 10.49 लाख करोड़, घाटे पर भी नजर

सरकार की कमाई 10.49 लाख करोड़, घाटे पर भी नजर

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में केंद्र सरकार की आय और खर्च से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। अप्रैल से जून 2026 के दौरान सरकार की कुल प्राप्तियां 10,49,243 करोड़ रुपये रहीं। यह पूरे वित्त वर्ष के बजट अनुमान का 28.7 प्रतिशत है और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 11.5 प्रतिशत अधिक है।  सरकार ने इस अवधि में खर्च के साथ-साथ पूंजीगत परियोजनाओं पर भी जोर बनाए रखा। जून तक केंद्र का कुल व्यय 13,57,076 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान का 25.4 प्रतिशत है। वहीं, पहली तिमाही में राजकोषीय घाटा करीब 3.1 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पूरे साल के बजट अनुमान का 18.2 प्रतिशत है।  प्राप्तियों की बात करें तो अप्रैल-जून के दौरान केंद्र को 6,36,576 करोड़ रुपये का शुद्ध कर राजस्व मिला। गैर-कर राजस्व से 3,77,664 करोड़ रुपये और गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों से 35,003 करोड़ रुपये हासिल हुए। सरकार के कुल राजस्व में इन स्रोतों की अहम भूमिका रही।  इसी अवधि में राज्यों को केंद्रीय करों में उनके हिस्से के रूप में 2,63,336 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए। हालांकि, पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में राज्यों को किया गया यह हस्तांतरण 63,605 करोड़ रुपये कम रहा।  बुनियादी ढांचे पर खर्च सरकार की प्राथमिकताओं में बना हुआ है। राजमार्ग, रेलवे और बंदरगाह जैसी परियोजनाओं पर पूंजीगत व्यय पहली तिमाही में 23.7 प्रतिशत बढ़कर 3,40,258 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 2.75 लाख करोड़ रुपये था। बढ़ा हुआ कैपेक्स आर्थिक गतिविधियों को गति देने और निजी निवेश के लिए माहौल तैयार करने की सरकार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।  सरकारी खर्च में ब्याज भुगतान और सब्सिडी का भी बड़ा हिस्सा रहा। पहली तिमाही में 3,46,414 करोड़ रुपये ब्याज भुगतान पर खर्च हुए। वहीं, एलपीजी और किसानों के लिए उर्वरक जैसी प्रमुख सब्सिडी पर 1,14,812 करोड़ रुपये खर्च किए गए।  राजकोषीय प्रबंधन के मोर्चे पर सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए घाटे को और कम करने का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र ने राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 प्रतिशत तक सीमित किया था। अब वित्त वर्ष 2026-27 में इसे घटाकर 4.3 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।  राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, घाटा कम होने से सरकार की उधारी का दबाव घट सकता है और वित्तीय व्यवस्था में निजी क्षेत्र के लिए ऋण की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। इससे निवेश, मांग और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने की उम्मीद रहती है।

Comment / Reply From

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!