जोधपुर : सीपीआर एक नया जीवनदान - डॉ. तातेड़
- ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार‘ अभियान के अन्तर्गत सीपीआर प्रशिक्षण कार्यशाला सहित विभिन्न विषयक सेमीनार का हुआ आयोजन
जोधपुर। सीपीआर यानी सही समय पर दिया गया सीने पर दबाव और कृत्रिम सांस, कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में जीवनदान साबित हो सकता है। कई बार एम्बूलेंस पहुंचने से पहले ही कुछ सैकंड का सही प्रयास किसी की जिंदगी को दोबारा शुरू कर सकता है। ये कहना है सीपीआर (कार्डियो पुल्मोनरी रिस्ससिटेशन) नेशनल ट्रेनर डॉ. राजेन्द्र तातेड़ का। वे मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी जोधपुर में 17 सितम्बर से 02 अक्टूबर तक सम्पन्न हो रहे ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार‘ अभियान के अन्तर्गत आयोजित हुई एक दिवसीय सीपीआर प्रशिक्षण कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। सीपीआर क्या है, क्यो देते है, कब देते है और किस-किस परिस्थिति में देना चाहिए। सीपीआर दो प्रकार के होते है मुंह से मुंह सांस लेना और स्टेबल करना। उन्होंने कहा कि हार्ट अटैक, हार्ट फैल, साइलेन्ट अटैक व कार्डियक अरेस्ट पीडित व्यक्ति के मस्तिष्क के अन्दर 5 मिनट तक खून और ऑक्सीजन रहता है। इसके रहते-रहते यदि मरीज को सीपीआर दे दिया जाता है तो 5 से 10 मिनट के अन्दर उसकी सांसे वापिस आ जाती है। यूनिवर्सिटी प्रेसिडेंट डॉ. जमील काजमी ने जानकारी दी कि ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार‘ अभियान के प्रारम्भ में पब्लिक हैल्थ विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सदाकत बशीर ने ‘महिलाओं के जीवन में पोषण का महत्व‘ विषय पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। जिसका उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण के बारे में जागरूकता फैलाना और परिवार व समाज को मज़बूत बनाने में एक स्वस्थ महिला की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करना था। साथ ही सोमवार 29 सितम्बर को 60 से अधिक देशों में कार्यरत ‘न्यूट्रिशन इंटरनेशनल राजस्थान‘ नामक राष्ट्रीय संस्थान के सहयोग से ऑनलाइन माध्यम से आयेाजित हुए ‘थायरॉइड स्वास्थ्य के लिए आयोडीन युक्त नमक के सेवन का महत्व‘ विषयक वेबीनार में संस्थान के वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक ‘तौसिफ उर रहमान‘ ने आयोडिन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों (आईडीडी) को दूर करने में हमारा संस्थान राजस्थान स्वास्थ्य विभाग को सहयोग करता है। कार्यक्रम प्रभारी एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रेहाना बेगम ने बताया कि अंत में यूनिवर्सिटी चैयरपर्सन मोहम्मद अतीक ने अतिथियों को पुष्प भेंट कर सम्मान किया। इस अभियान की सफलता में डॉ राजेन्द्र तातेड़ के सहयेगी लाल चंद चांडक, डीन एकेडमिक्स डॉ. इमरान खान पठान, डीन एज्यूकेशन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. समीना, डॉ. साबरा, डॉ. अब्दुल्लाह खालिद, डॉ. रितिका वैष्णव, डॉ. राजकुमार माथुर, जीशान अली, आसिफ, मुजफ्फर कुरैशी, निलोफर जेहरा, नाजमीन, फरहाना सिद्दीकी, आलिया सहित समस्त स्टाफ का विशेष सहयोग रहा।