6 साल के बच्चे की बिना बड़े चीरे किडनी सर्जरी सफल
झालावाड़। एसआरजी चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज, झालावाड़ के यूरोलॉजी विभाग में चिकित्सकों ने 6 वर्षीय बालक की जटिल किडनी सर्जरी एडवांस लैप्रोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक की। बालक की प्रभावित किडनी की कार्यक्षमता महज 27 प्रतिशत रह गई थी। चिकित्सकों के मुताबिक समय पर उपचार नहीं मिलने पर किडनी के पूरी तरह खराब होने का खतरा था।
यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल नेनीवाल ने बताया कि झालावाड़ निवासी बालक गर्वित करीब दो वर्षों से पेट दर्द, उल्टी और कमजोरी की समस्या से परेशान था। इस दौरान उसका वजन भी कम हो रहा था। जांच में पता चला कि किडनी और यूरिनरी ट्रैक्ट के जंक्शन पर जन्मजात रुकावट के कारण किडनी पर दबाव बढ़ रहा था।
डॉक्टरों के अनुसार यह समस्या जन्मजात थी। यूरोटेरिक जंक्शन पर रुकावट के कारण पेशाब का सामान्य प्रवाह बाधित हो रहा था। लंबे समय तक रुकावट रहने से किडनी पर दबाव बढ़ता गया और उसकी कार्यक्षमता घटकर 27 प्रतिशत रह गई।
3 से 4 घंटे चला ऑपरेशन
बालक की कम उम्र को देखते हुए सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। परिजनों को आवश्यक परामर्श देने के बाद चिकित्सकों ने दूरबीन पद्धति से ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। करीब 3 से 4 घंटे चले ऑपरेशन में लैप्रोस्कोपिक तकनीक के जरिए किडनी और यूरिनरी ट्रैक्ट के बीच मौजूद रुकावट को दूर किया गया। इसके बाद किडनी को दोबारा पेशाब की नली से जोड़ा गया।
चिकित्सकों ने बताया कि ऑपरेशन सफल रहा। समय पर सर्जरी होने से प्रभावित किडनी को और अधिक खराब होने से बचाने में मदद मिली। उपचार के बाद बालक की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार बताया गया है।
बड़े चीरे की जरूरत नहीं पड़ी
आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीक के जरिए सर्जरी किए जाने से बालक के शरीर पर बड़ा चीरा नहीं लगाना पड़ा। चिकित्सा टीम के अनुसार इस तकनीक में चीरा अपेक्षाकृत छोटा होने से दर्द और रिकवरी से जुड़ी परेशानी कम हो सकती है। ऑपरेशन के कुछ घंटे बाद ही बालक ने सामान्य रूप से खाना-पीना शुरू कर दिया।
डॉ. विशाल नेनीवाल ने बताया कि चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयास से यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई। उन्होंने बताया कि बालक की लगातार निगरानी की जा रही है और उसकी स्थिति में सुधार है।
इन चिकित्सकों और स्टाफ का रहा सहयोग
सर्जरी में डॉ. राजन नन्दा, डॉ. आलोक, एनेस्थीसिया टीम तथा चिकित्सा कर्मियों कीर्ति मित्तल, दिलीप कलाल, मुकेश सांवरिया, तूफान सहित अन्य स्टाफ का सहयोग रहा। टीम के संयुक्त प्रयासों से बालक की जटिल किडनी सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई।