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मणिपुर में NDA की वापसी, खेमचंद बनेंगे मुख्यमंत्री

मणिपुर में NDA की वापसी, खेमचंद बनेंगे मुख्यमंत्री

  • मणिपुर में खेमचंद सिंह ने सरकार बनाने का दावा पेश किया

  • शाम 6 बजे मुख्यमंत्री और दो डिप्टी सीएम का शपथ ग्रहण

  • कुकी और नागा समुदाय को नई सरकार में प्रतिनिधित्व

इंफाल। मणिपुर में करीब एक साल बाद एक बार फिर निर्वाचित सरकार बनने जा रही है। राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त होने से पहले एनडीए ने सरकार गठन की प्रक्रिया तेज कर दी है। भाजपा विधायक दल के नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार को राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया।

खेमचंद सिंह वरिष्ठ भाजपा नेताओं और विधायकों के साथ चार्टर्ड विमान से इंफाल पहुंचे। इसके बाद उन्होंने राजभवन जाकर समर्थन पत्र सौंपे। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के रूप में उनका शपथ ग्रहण समारोह आज शाम 6 बजे लोकभवन में आयोजित होगा।

नई सरकार में दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे, ताकि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन कायम रखा जा सके। कुकी समुदाय से नेम्चा किपगेन और नागा समुदाय से लोधी दिखो को डिप्टी सीएम बनाया जाएगा। नेम्चा राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री होंगी। वहीं, कोंथौजम गोविंदास सिंह को गृह मंत्री बनाए जाने की संभावना है।

गौरतलब है कि मणिपुर में 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू था। मैतेई और कुकी समुदाय के बीच हिंसा के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। अब 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त हो रही है, जिसके चलते नई सरकार का गठन किया जा रहा है।

नई दिल्ली में हाल ही में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में युमनाम खेमचंद सिंह को नेता चुना गया था। इसके बाद एनडीए के घटक दलों ने भी उन्हें समर्थन देने पर सहमति जताई।

खेमचंद सिंह इंफाल वेस्ट के सिंगजामेई क्षेत्र से विधायक हैं। वे 2017 से 2022 तक विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं और बीरेन सिंह सरकार में मंत्री भी रहे हैं। हाल के समय में वे शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आए हैं, जिससे उनकी छवि एक संतुलित नेता की बनी है।

उपमुख्यमंत्री बनने जा रहीं नेम्चा किपगेन पहले भी राज्य सरकार में मंत्री रह चुकी हैं। वे कुकी-जो समुदाय की प्रमुख नेता मानी जाती हैं और हिंसा के दौरान उनका आवास भी क्षतिग्रस्त हुआ था।

वर्तमान में 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 37 विधायक हैं। बहुमत के आंकड़े को देखते हुए एनडीए सरकार को स्थिर माना जा रहा है। सरकार का कार्यकाल 2027 तक रहेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में शांति बहाल करना और विभिन्न समुदायों के बीच भरोसा कायम करना होगी।

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