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पशु आहार एवं चारे के संरक्षण की महत्वपूर्ण विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

पशु आहार एवं चारे के संरक्षण की महत्वपूर्ण विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

श्रीगंगानगर। पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के अंतर्गत कार्यरत पशु विज्ञान केंद्र, सूरतगढ़ द्वारा पशु आहार एवं चारे के संरक्षण की महत्वपूर्ण विधियाँ विषय पर एक दिवसीय संस्थागत प्रशिक्षण शिविर का आयोजन शनिवार को किया गया। केंद्र प्रभारी अधिकारी डॉ. राजकुमार बेरवाल नेे बताया की इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों को हरे एवं सूखे चारे को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करने तथा वर्षभर पशुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण आहार उपलब्ध कराने के संबंध में जागरूक करना है। पशुपालन में चारे की उपलब्धता एवं गुणवत्ता का पशुओं के स्वास्थ्य, वृद्धि, प्रजनन क्षमता तथा दुग्ध उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। वर्ष के कुछ समय में हरे चारे की अधिक उपलब्धता होती है, जबकि गर्मी एवं सूखे के समय इसकी कमी हो जाती है। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त हरे चारे का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान साइलेज बनाने, सूखे चारे का भंडारण तथा पोषक तत्वों को सुरक्षित रखने की विभिन्न विधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि मक्का, ज्वार एवं अन्य उपयुक्त हरे चारे को वैज्ञानिक विधि से किण्वित करके साइलेज के रूप में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। पशुपालकों को चारे में नमी की उचित मात्रा, कटाई की अवस्था, भंडारण स्थल की स्वच्छता तथा संरक्षण के दौरान होने वाले पोषक तत्वों के नुकसान को कम करने के उपायों के बारे में भी जानकारी दी गई। डॉ. बेरवाल ने बताया कि पशुपालकों को अपने स्तर पर चारे के संरक्षण की वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही पशुपालकों को केंद्र की प्रयोगशाला, अजोला यूनिट का प्रदर्शन और अजोला लगाने और उसके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस प्रशिक्षण शिविर में कुल 30 पशुपालकों ने भाग लिया।

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