राजस्थान में चार चरणों में पंचायतीराज चुनाव, 22 दिसंबर को चार जिलों में प्रमुख-प्रधान का चुनाव
जयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक प्रदेश में पंचायत चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है। इन चुनावों में करीब 1.69 लाख पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों का निर्वाचन होना है।
चुनाव में ग्राम पंचायत से लेकर जिला परिषद स्तर तक प्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच चुने जाएंगे, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा होंगे।
चार जिलों में 22 दिसंबर को प्रमुख और प्रधान का चुनाव
चुनाव कार्यक्रम के अनुसार कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली जिलों में जिला प्रमुख और प्रधान पदों के चुनाव 22 दिसंबर को कराए जाएंगे। इन पदों का चुनाव सीधे मतदाताओं से नहीं होता। जिला परिषद सदस्य मिलकर जिला प्रमुख और पंचायत समिति सदस्य अपने-अपने पंचायत समिति क्षेत्र में प्रधान का चुनाव करते हैं।
प्रदेश में कुल 41 जिला परिषद और 457 पंचायत समितियां हैं। जिला परिषद के 1,403 सदस्यों और पंचायत समिति के 8,245 सदस्यों के चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे।
पंच-सरपंच के लिए बैलेट, सदस्य पदों पर EVM
इस बार मतदान व्यवस्था में पद के हिसाब से अंतर रखा गया है। सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर से होंगे। वहीं पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के चुनाव ईवीएम के जरिए कराए जाएंगे। इस व्यवस्था के चलते ग्रामीण मतदाताओं को अलग-अलग पदों के लिए अलग मतदान प्रक्रिया का सामना करना होगा।
पंचायतीराज चुनाव में करीब 1.69 लाख प्रतिनिधियों का निर्वाचन होना है। इसमें 1,403 जिला परिषद सदस्य, 8,245 पंचायत समिति सदस्य और 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच-उपसरपंच के साथ 1.30 लाख से ज्यादा वार्ड पंच शामिल हैं।
महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण
पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है। इसके तहत करीब 7,200 ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच चुनी जाएंगी। वहीं करीब 65 हजार वार्ड पंच पदों पर भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।
सरपंच पदों में अनुसूचित जनजाति के लिए 3,058, अनुसूचित जाति के लिए 2,493 और ओबीसी के लिए 1,961 पद आरक्षित हैं। वार्ड पंचों के 1,30,584 पदों में 21,962 एससी, 19,117 एसटी और करीब 15 हजार पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।
बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूम्बर में सरपंच के सभी 1,253 पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।
4.03 करोड़ से ज्यादा मतदाता करेंगे मतदान
पंचायतीराज चुनाव में प्रदेश के करीब 4.03 करोड़ मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक मतदाता सूची में पुरुष मतदाताओं की हिस्सेदारी 51.82 प्रतिशत और महिला मतदाताओं की हिस्सेदारी 48.18 प्रतिशत है।
41 जिलों में जयपुर में सबसे ज्यादा करीब 18.99 लाख मतदाता बताए गए हैं, जबकि जैसलमेर में सबसे कम करीब 4.36 लाख मतदाता हैं। ग्रामीण क्षेत्र के इस बड़े चुनाव के लिए प्रशासन और पुलिस स्तर पर भी व्यापक तैयारियां की गई हैं।
2.72 लाख पुलिसकर्मियों की तैनाती
पंचायतीराज चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए करीब 2.72 लाख पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। चार चरणों में मतदान होने के कारण सुरक्षा बलों की तैनाती भी चरणवार की जाएगी।
चुनाव आयोग की तैयारियों में मतदान केंद्रों, ईवीएम की सुरक्षा, मतगणना व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर अलग-अलग स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव की मतगणना जिला स्तर पर कराए जाने की व्यवस्था भी पहले से तय की गई है।
आचार संहिता लागू, ग्रामीण इलाकों में नई घोषणाओं पर रोक
चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। इसके साथ ही तबादलों और सरकारी घोषणाओं पर चुनाव संबंधी प्रतिबंध लागू हो गए हैं। मंत्री अपने क्षेत्रों में सरकारी वाहनों के इस्तेमाल और सरकारी गेस्ट हाउस या डाक बंगलों में ठहरने से संबंधित निर्धारित पाबंदियों के दायरे में रहेंगे।
सरकार ऐसी नई योजनाओं या कार्यक्रमों की घोषणा नहीं कर सकेगी, जिनसे मतदाताओं पर प्रभाव पड़ने की आशंका हो। हालांकि, पहले से स्वीकृत और चल रहे विकास कार्य जारी रह सकते हैं। जिन कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पहले से शुरू हो चुकी है, उन पर भी केवल चुनाव आचार संहिता के कारण रोक नहीं लगेगी।
गांवों में बढ़ेगी चुनावी सरगर्मी
पंचायतीराज चुनाव की घोषणा के साथ ही गांवों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। ग्राम पंचायत से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर तक दावेदार सक्रिय होंगे। आरक्षण की स्थिति पहले ही स्पष्ट हो जाने के बाद अब स्थानीय स्तर पर उम्मीदवारों की तलाश और चुनावी रणनीति पर फोकस बढ़ेगा।
इन चुनावों में केवल सरपंच और वार्ड पंच के नतीजे ही महत्वपूर्ण नहीं होंगे। पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य पदों के परिणाम आगे होने वाले प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव की तस्वीर भी तय करेंगे।
प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव में बनेंगे समीकरण
पंचायत समिति सदस्य मिलकर प्रधान और जिला परिषद सदस्य मिलकर जिला प्रमुख का चुनाव करते हैं। ऐसे में इन पदों के लिए चुने गए सदस्यों की संख्या के आधार पर बाद में राजनीतिक समीकरण बनेंगे।
राजनीतिक दलों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन की सक्रियता और स्थानीय स्तर पर समर्थन का आकलन करने का यह बड़ा अवसर होगा। निकाय चुनावों की तरह यहां भी प्रमुख और प्रधान के चुनाव में स्थानीय समीकरणों और सदस्यों के समर्थन की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। चुनाव परिणाम आने के बाद ही अलग-अलग पंचायत समितियों और जिला परिषदों में नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ होगी।
पंचायत चुनावों पर सबकी नजर
नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर अगला बड़ा चुनावी कार्यक्रम है। चार चरणों में होने वाले चुनावों में लाखों मतदाता गांव की स्थानीय सरकार के प्रतिनिधियों का चयन करेंगे।
महिलाओं के 50 प्रतिशत आरक्षण, बैलेट और ईवीएम की अलग-अलग व्यवस्था, 1.69 लाख के करीब प्रतिनिधियों के निर्वाचन और चार चरणों में मतदान के चलते इस चुनाव की प्रक्रिया व्यापक रहेगी। अब निगाहें मतदान की तारीखों, नामांकन और चरणवार चुनाव कार्यक्रम पर रहेंगी।