E20 पेट्रोल पर फैलाई जा रहीं अफवाहें गलत, सरकार ने दी पूरी सफाई
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ई20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर सोशल Media पर फैल रही अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि ई20 पेट्रोल से इंजन खराब होने, वाहन के पुर्जों में जंग लगने, प्रदूषण बढ़ने या माइलेज में भारी गिरावट आने जैसे दावे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
मंत्रालय के अनुसार, ई20 को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा करने के लिए निराधार जानकारियां प्रसारित की जा रही हैं, जबकि प्रमुख ऑटोमोटिव और अनुसंधान संस्थानों की रिपोर्ट इसके उलट तस्वीर पेश करती हैं।
सरकार ने बताया कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स और Indian Oil Corporation के संयुक्त अध्ययनों में पाया गया कि ई20 के उपयोग से वाहनों से निकलने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड और अनबर्न्ट हाइड्रोकार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आती है।
अध्ययन के मुताबिक, दोपहिया वाहनों में कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन करीब 50 प्रतिशत और चारपहिया वाहनों में लगभग 30 प्रतिशत तक कम हुआ। वहीं, दोनों श्रेणी के वाहनों में अनबर्न्ट हाइड्रोकार्बन उत्सर्जन में करीब 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ई20 पेट्रोल से इंजन की कार्यक्षमता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पाया गया है। इसके विपरीत, ई20 के लिए तैयार वाहनों में बेहतर एक्सीलरेशन, बेहतर राइड क्वालिटी और ई10 की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन देखा गया है। सरकार का कहना है कि ई20 ईंधन इंजन की एंटी-नॉकिंग क्षमता को भी बेहतर बनाता है।
सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया जा रहा था कि ई20 पेट्रोल की वजह से फ्यूल टैंक पर चींटियां या मधुमक्खियां आकर्षित होती हैं। सरकार ने इस दावे को भी पूरी तरह गलत बताया। मंत्रालय के अनुसार, पेट्रोल में इस्तेमाल होने वाला फ्यूल-ग्रेड एथेनॉल शर्करारहित होता है और उसमें मिलाए जाने वाले तत्व कीटों को दूर रखते हैं।
एथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक पानी की खपत संबंधी दावों को भी सरकार ने भ्रामक बताया। मंत्रालय का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए मुख्य रूप से अतिरिक्त या मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त टूटे चावल और अतिरिक्त गन्ने का उपयोग किया जाता है। साथ ही, कम पानी वाली फसल मक्का को एथेनॉल उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम से गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हुआ है, किसानों की आय में वृद्धि हुई है और अतिरिक्त कृषि उत्पादन के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध हुआ है। इसके अलावा, इससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद मिल रही है।
मंत्रालय ने कहा कि भविष्य में यदि ई20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर विचार किया जाता है, तो उससे पहले व्यापक तकनीकी परीक्षण और विशेषज्ञों से परामर्श किया जाएगा। फिलहाल सरकार ई20 कार्यक्रम के प्रभावों की लगातार समीक्षा कर रही है।