SIR पर जयराम रमेश का बड़ा दावा, बोले- 32% मतदाता प्रभावित
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को दावा किया कि SIR के तीसरे चरण में अब तक बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं या उन्हें अपनी पात्रता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देने को कहा गया है।
रमेश के मुताबिक उपलब्ध आंकड़ों को जोड़ने पर करीब 32 फीसदी मतदाता इस प्रक्रिया से प्रभावित दिखाई देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे कई मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बने रहने को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई है। यह आंकड़ा और इसकी व्याख्या कांग्रेस नेता की ओर से किए गए दावे पर आधारित है।
तीसरे चरण में 6 करोड़ से ज्यादा नाम हटने का दावा
जयराम रमेश ने कहा कि SIR का पहला चरण जून 2025 में बिहार से शुरू हुआ था। इसके बाद नवंबर 2025 में नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरा चरण शुरू किया गया। उनके अनुसार, पहले दो चरणों में करीब 7.8 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे।
तीसरे चरण की शुरुआत 2026 के मध्य में 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में हुई। निर्वाचन आयोग के मुताबिक इस चरण में करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं को घर-घर जाकर सत्यापन प्रक्रिया में शामिल किया गया।
रमेश ने 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि करीब 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। उन्होंने करीब 5.43 करोड़ मतदाताओं को अतिरिक्त दस्तावेज देने के लिए नोटिस दिए जाने का भी दावा किया। दोनों आंकड़ों को जोड़कर उन्होंने करीब 32 फीसदी मतदाताओं के प्रभावित होने की बात कही।
उपलब्ध ड्राफ्ट मतदाता सूचियों के संकलित आंकड़ों में तीसरे चरण में करीब 6.15 करोड़ नाम हटाए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, ड्राफ्ट सूची से नाम हटना अंतिम रूप से मतदाता सूची से बाहर होना नहीं माना जाता, क्योंकि दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया भी होती है।
दिल्ली समेत कई राज्यों के आंकड़े गिनाए
कांग्रेस नेता ने राज्यवार आंकड़े भी सामने रखे। उनके मुताबिक दिल्ली में 53.73 फीसदी, चंडीगढ़ में 52.58 फीसदी, तेलंगाना में 48.90 फीसदी, झारखंड में 39.57 फीसदी और हरियाणा में 37.5 फीसदी मतदाता इस प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने उत्तराखंड में 35.71 फीसदी, मेघालय में 35.36 फीसदी, महाराष्ट्र में 33.88 फीसदी, कर्नाटक में 27.6 फीसदी, ओडिशा में 23.67 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 21.17 फीसदी और पंजाब में 15.23 फीसदी का आंकड़ा बताया।
दिल्ली में SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी चल रही है। हाल में दिल्ली में 33 लाख से अधिक मतदाताओं को रिकॉर्ड में विसंगतियों या पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग न होने के संबंध में नोटिस दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
कमजोर वर्गों को लेकर भी उठाए सवाल
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया में आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई बड़े राज्यों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के नाम अधिक संख्या में हटाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों से ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जो उनके पास उपलब्ध नहीं हैं। कांग्रेस नेता ने इसी आधार पर SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे संविधान और मताधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
वहीं, चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करने की प्रक्रिया के तौर पर प्रस्तुत करता है। आयोग के अनुसार इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति उसमें शामिल न हो। आयोग ने यह भी कहा है कि प्रक्रिया में मतदाताओं, राजनीतिक दलों और चुनाव अधिकारियों की भागीदारी रहती है।
इस बीच SIR को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस भी जारी है। दिल्ली में SIR से संबंधित एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 22 सितंबर को सुनवाई करने वाला है। याचिका में नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम और नोटिस जारी करने के आधार को सार्वजनिक करने की मांग की गई है।