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PM मोदी की मिमिक्री पर बवाल, राहुल गांधी के कार्यक्रम पर BJP का हमला

PM मोदी की मिमिक्री पर बवाल, राहुल गांधी के कार्यक्रम पर BJP का हमला

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री का वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम में स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने पीएम मोदी के बोलने के अंदाज और हाव-भाव की नकल करते हुए राजनीतिक मुद्दों पर व्यंग्य किया।

मणि ने प्रधानमंत्री के विदेशी नेताओं से संवाद के अंदाज को कॉमेडी का हिस्सा बनाया। उन्होंने बार-बार ‘माई फ्रेंड’ जैसे संबोधन का इस्तेमाल किया। इस दौरान राहुल गांधी ने भी मंच से मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी। प्रस्तुति में प्रधानमंत्री की विदेश नीति, हाल की सार्वजनिक गतिविधियों और बच्चों के साथ किए गए सिक्के के ट्रिक का भी संदर्भ दिया गया।

बुजुर्ग महिला के संदर्भ पर बढ़ा विवाद

कॉमेडियन की प्रस्तुति के दौरान प्रधानमंत्री की एक रैली में बुजुर्ग महिला के लिए कुर्सी मंगवाने की घटना का भी जिक्र किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, इसी हिस्से को लेकर भाजपा नेताओं ने सबसे ज्यादा आपत्ति जताई और इसे प्रधानमंत्री की दिवंगत मां से जोड़कर आलोचना की। वीडियो में राहुल गांधी को प्रस्तुति के दौरान हंसते हुए भी देखा गया।

कार्यक्रम से जुड़े वीडियो कांग्रेस नेताओं और पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल से भी साझा किए गए। इसके बाद यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गई और राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई।

BJP नेताओं ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

वीडियो सामने आने के बाद भाजपा के कई नेताओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस की आलोचना की। भाजपा के राष्ट्रीय सोशल मीडिया हैंडल ने आरोप लगाया कि एक ओर प्रधानमंत्री ने बुजुर्ग महिला के प्रति सम्मान दिखाया, वहीं दूसरी ओर उनके कार्यक्रम में उसका मजाक बनाया गया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की दिवंगत मां के संदर्भ का इस्तेमाल मजाक के लिए किया गया और इसे राजनीतिक संवेदनशीलता की कमी बताया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मां को राजनीति का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक विरोध और परिवार से जुड़े व्यक्तिगत संदर्भों के बीच मर्यादा बनाए रखने की बात कही।

राजनीतिक व्यंग्य और मर्यादा पर बहस

घटना के बाद बहस सिर्फ भाजपा और कांग्रेस की बयानबाजी तक सीमित नहीं रही। सोशल मीडिया पर भी यह सवाल उठ रहा है कि राजनीतिक व्यंग्य की सीमा क्या होनी चाहिए और सार्वजनिक मंच पर नेताओं के परिवार या निजी संदर्भों को हास्य का हिस्सा बनाने को किस तरह देखा जाए।

एक पक्ष इस प्रस्तुति को राजनीतिक व्यंग्य और कॉमेडी के रूप में देख रहा है, जबकि भाजपा नेताओं ने बुजुर्ग महिला और प्रधानमंत्री की दिवंगत मां से जुड़े संदर्भों पर आपत्ति जताई है। इस तरह इंदौर के कार्यक्रम का यह हिस्सा अब राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में आ गया है।

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