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अनुसूचित क्षेत्र के जनजातीय किसानों को सोलर पम्प संयंत्र की स्थापना पर शत्-प्रतिशत अनुदान- जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री

अनुसूचित क्षेत्र के जनजातीय किसानों को सोलर पम्प संयंत्र की स्थापना पर शत्-प्रतिशत अनुदान- जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री

जयपुर। जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि पीएम कुसुम योजना कम्पोनेंट-बी के तहत अनुसूचित क्षेत्र के जनजातीय किसानों को सौर ऊर्जा चालित पम्पसेट शत-प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में योजना के तहत 4,313 कृषकों को लाभान्वित किया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि शेष रहे आवेदनों को भी शीघ्र ही अनुदान की कार्यवाही की जाएगी। जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक प्रताप लाल भील द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत सौर ऊर्जा पम्प संयंत्र की स्थापना के लिए इकाई लागत का 30 प्रतिशत राज्य सरकार तथा 30 प्रतिशत केन्द्र सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है। इसके अलावा राज्य के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को राज्य मद से प्रति संयंत्र 45 हजार रुपये का अतिरिक्त अनुदान दिया जाता है। मंत्री खराड़ी ने कहा कि टीएडी क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति कृषकों को राज्य मद से 45 हजार रुपये के अतिरिक्त अनुदान के बाद शेष कृषक अंश की राशि जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा वहन की जाती है, जिससे इन क्षेत्रों के किसानों के लिए सौर ऊर्जा पम्प संयंत्र शत-प्रतिशत अनुदान पर स्थापित कराए जाते हैं। उन्होंने बताया कि योजना के तहत वर्ष 2020-21 में 750, वर्ष 2021-22 में 1626, वर्ष 2022-23 में 96, वर्ष 2023-24 में 517, वर्ष 2024-25 में 728 तथा वर्ष 2025-26 में 4,313 कृषकों को लाभान्वित किया गया। मूल प्रश्न के लिखित उत्तर में ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि अनुसूचित क्षेत्र के जनजातीय कृषकों को सौर ऊर्जा चालित पम्पसेट उपलब्ध करवाने के लिए पीएम कुसुम योजना कम्पोनेंट-बी के अंतर्गत योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत अनुसूचित क्षेत्र के जनजातीय किसानों को बिना किसी कृषक अंश राशि के सम्पूर्ण खर्च पर सोलर पम्प उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा उद्यानिकी विभाग के माध्यम से संचालित योजनाओं में अनुदान राशि का प्रावधान किया गया है, जबकि शेष कृषक अंश की राशि जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा वहन की जाती है। मंत्री खराड़ी ने योजना के अंतर्गत वर्षवार जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा आवंटित राशि, व्यय राशि तथा लाभान्वित किसानों की संख्या का विवरण भी सदन के पटल पर रखा।

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