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एनएचएम की चतुर्थ रीजनल कॉन्फ्रेंस

एनएचएम की चतुर्थ रीजनल कॉन्फ्रेंस

  • आयुष्मान आरोग्य मंदिर होंगे जनस्वास्थ्य की प्रमुख धुरी: एसीएस

  • चिकित्सा आगामी 2 वर्ष में 1 लाख 73 हजार आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को उन्नत करने का लक्ष्य : अतिरिक्त सचिव, स्वास्थ्य मंत्रालय

जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आयुष्मान भारत के संकल्प को साकार करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम किया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर इस दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने कहा कि गांव-ढाणी तक प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने में आयुष्मान आरोग्य मंदिर जनस्वास्थ्य की प्रमुख धुरी के रूप में काम करेंगे।

सिंह बुधवार को जोधपुर में आयोजित राष्टीय स्वास्थ्य मिशन की चतुर्थ रीजनल कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रही थीं। सात राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के लिए इस कॉन्फ्रेंस की मेजबानी एनएचएम राजस्थान कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह कॉन्फ्रेंस आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक कॉम्प्रीहेंसिव प्राइमरी हेल्थ केयर, क्वालिटी एण्ड पेशेंट सेफ्टी, इण्डियन पब्लिक हैल्थ स्टैण्डर्ड, कम्यूनिटी प्रोसेसेज, मानव संसाधन, निःशुल्क दवा आपूर्ति एवं स्वास्थ्य के आधारभूत ढांचे का सुदृढ़ीकरण और उन्नयन करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कदम उठा रही है। इस वित्तीय वर्ष में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 8.26 प्रतिशत बजट आवंटन किया गया है, जो अब तक का सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि एनएचएम स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा एक महत्वाकांक्षी फ्लैगशिप कार्यकम है। इससे देशभर में निचले स्तर तक चिकित्सा तंत्र मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि आईएचएमएस एवं आभा आईडी जैसे तकनीकी कार्यक्रम स्वास्थ्य के क्षेत्र में गेम चेंजर साबित होंगे। सिंह ने एनएचएम की शुरूआत के समय के अपने अनुभवों को भी साझा किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक एनएचएम आराधना पटनायक ने कहा कि आगामी दो वर्षों में देशभर में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 1 लाख 73 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को क्रियाशील किया जाएगा। यहां 12 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसके लिए सीएचओ एवं अन्य स्वास्थ्य कार्मिकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हैल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत गांव-ढाणी तक चिकित्सा के आधारभूत ढांचे को चरणबद्ध रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

अतिरिक्त सचिव ने कहा कि ग्रामीण स्तर तक आमजन को बेहतर सेवाएं देने के लिए हमें हैल्थ फैसेलिटी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही, दवाओं के आपूर्ति तंत्र को भी और सुगम बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों पर संपादित होने वाली गतिविधियों को और सरल करने के लिए विभिन्न पोर्टल्स को इंटीग्रेटेड रूप में संचालित किया जाएगा। उन्होंने राज्यों से अपेक्षा की कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों का निचले स्तर तक पूरा लाभ पहुंचाने के लिए हर स्तर पर नियमित रूप से समीक्षा की जाए।

मिशन निदेशक, एनएचएम राजस्थान डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने स्वागत उद्बोधन दिया। इस अवसर पर भारत सरकार के संयुक्त सचिव नीति सौरभ जैन, कार्यकारी निदेशक एनएचएसआरसी अतुल कोटवाल, लक्षद्वीप के स्वास्थ्य सचिव अवनीश कुमार सहित गोवा, झारखण्ड, कर्नाटक, लक्षद्वीप, राजस्थान, दादर नागर हवेली, दमन, उड़ीसा, पुदुचैरी एवं दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे।

कार्यशाला के प्रथम दिन विभिन्न सत्रों में कॉम्प्रीहेंसिव प्राइमरी हेल्थ केयर थ्रू आयुष्मान आरोग्य मंदिर, नेशनल क्वालिटी एश्यारेंस स्टैण्डर्ड, इंटीग्रेशन ऑफ वेरियस पोर्टल्स, ह्यूमन रिसार्सेज फॉर हैल्थ, फ्री डग्स इनीशिएटिव, इन्फ्रास्ट्रक्चर रिफॉर्म सहित अन्य विषयों पर चर्चा की गई। दूसरे दिन गुरूवार को विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों का भ्रमण करेंगे।

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