रोहित-विराट की फील्डिंग का अलग अंदाज, कोच शुभदीप घोष ने बताई खासियत
नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में भारतीय खिलाड़ियों की फील्डिंग चर्चा में है। टीम के फील्डिंग कोच शुभदीप घोष ने सीनियर बल्लेबाज रोहित शर्मा और विराट कोहली की तारीफ करते हुए कहा कि दोनों को खेल की स्थिति और गेंद की दिशा समझने का अच्छा अनुभव है। उनकी यह क्षमता मैदान पर सही समय पर सही फैसला लेने में मदद करती है।
दूसरे वनडे से पहले पत्रकारों से बातचीत में घोष ने विराट कोहली की फील्डिंग का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि विराट लंबे समय तक कवर और पॉइंट जैसे अहम स्थानों पर फील्डिंग कर चुके हैं। इस वजह से उन्हें अच्छी तरह पता रहता है कि बल्लेबाज के शॉट खेलने के बाद गेंद किस दिशा में जा सकती है और टकराने के बाद उसका रुख क्या होगा। घोष के मुताबिक, विराट कई बार दूसरे खिलाड़ियों से पहले ही स्थिति भांप लेते हैं।
कोच ने पहले वनडे में डेरिल मिशेल के रन आउट होने का जिक्र करते हुए रोहित शर्मा की समझदारी को भी सराहा। उन्होंने कहा कि रोहित ने गेंद के स्क्वायर लेग की तरफ जाने का अनुमान पहले ही लगा लिया था। इसी कारण वह सीधे दौड़ने के बजाय उस दिशा में बढ़ने लगे। उनके इस शुरुआती मूवमेंट ने रन आउट करने में मदद की।
शुभदीप घोष ने कहा कि फील्डिंग में अंदाजा लगाने की क्षमता बेहद अहम होती है। केवल गेंद की ओर तेजी से दौड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि अगला शॉट किस दिशा में जा सकता है। रोहित और विराट का अनुभव इस मामले में टीम के लिए उपयोगी साबित होता है।
पहले वनडे में भारतीय टीम के प्रदर्शन पर भी कोच ने संतोष जताया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने अच्छे कैच पकड़े, विकेट लेने में मदद की और ग्राउंड फील्डिंग से गेंदबाजों का साथ दिया। टीम की ऊर्जा और मैदान पर सक्रियता भी अच्छी रही। विपक्षी टीम को करीब 180 रन पर रोकने में गेंदबाजी के साथ मजबूत फील्डिंग का भी योगदान रहा।
विदेशी मैदानों पर खेलने की चुनौतियों को लेकर घोष ने कहा कि हर देश में मैदान का आकार, मौसम और बाउंड्री की दूरी अलग-अलग होती है। ऐसे में खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है। ठंडे मौसम और अलग मैदानों पर फील्डिंग करते समय अतिरिक्त सतर्कता जरूरी होती है। इन पहलुओं पर टीम ड्रेसिंग रूम में नियमित रूप से चर्चा करती है।