34 साल का इंतजार, फिर चमका रवि किशन का सितारा
Mumbai : रवि किशन ने अपने करियर के शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी था जब इंडस्ट्री में कई लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेते थे। 90 के दशक में जब कई अभिनेता स्टारडम हासिल कर रहे थे, तब उनका मजाक उड़ाया जाता था और उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जाता था।
रियलिटी शो 'अलायंस' में साथी प्रतिभागियों से बातचीत के दौरान रवि किशन ने अपने जीवन के उन कठिन दिनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह खुद को एक अभिनेता के तौर पर पूरी तरह तैयार कर चुके थे, लेकिन सफलता उनसे दूर थी।
रवि ने बताया कि उन्होंने अपनी आवाज, अभिनय और भाषा पर काफी काम किया। उन्होंने घुड़सवारी सीखी, एक्शन की ट्रेनिंग ली, उर्दू और हिंदी पर पकड़ बनाई, थिएटर किया और डांस भी सीखा। इसके बावजूद उन्हें वह अवसर नहीं मिले, जिनकी उन्हें उम्मीद थी।
उन्होंने कहा, "मैं खुद से कहता था कि अगर दूसरों का समय आया है, तो मेरा भी आएगा। बस यह नहीं पता था कि मुझे अपने समय के लिए 34 साल इंतजार करना पड़ेगा।"
अभिनेता ने बताया कि हालात तब बदले जब उनके काम को लोगों ने सराहा और उन्हें बड़े मंचों पर पहचान मिलने लगी। उन्होंने कहा कि जिस साल उन्हें व्यापक प्रशंसा मिली, उसी वर्ष उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के कई पुरस्कार अपने नाम किए।
रवि किशन ने भावुक होकर कहा कि एक समय था जब उन्हें किसी मंच पर बुलाया तक नहीं जाता था, लेकिन आज वही लोग उनके काम की तारीफ करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी को विश्वास नहीं था कि वह इतनी लंबी पारी खेल पाएंगे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
रवि किशन ने अपने करियर की शुरुआत 90 के दशक में फिल्मों जैसे पीतांबर, आतंक, आर्मी और जख्मी दिल से की थी। हालांकि उन्हें सबसे बड़ी लोकप्रियता भोजपुरी सिनेमा से मिली।
सैयां हमार और पंडित जी बताई ना बियाह कब होई जैसी फिल्मों ने उन्हें भोजपुरी सिनेमा का बड़ा चेहरा बना दिया। हाल के वर्षों में उन्होंने हिंदी सिनेमा और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई है।
फिल्म लापता लेडीज में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा, जबकि वेब सीरीज खाकी: द बिहार चैप्टर में उनकी भूमिका ने एक बहुमुखी अभिनेता के रूप में उनकी पहचान को और मजबूत किया।