इंडिया वर्सेस भारत को लेकर बयानों की धुंआधार बल्लेबाज़ी शुरू
लगता है देश में आगामी लोकसभा चुनाव विवादों के साये में होगा। चुनावों के मधे नज़र पक्ष और विपक्ष में
रोजाना किसी न किसी बात पर विवादित बहस छिड़ जाती है। सनातन धर्म को लेकर उठा विवाद अभी थमा
भी नहीं था की इंडिया वर्सेस भारत को लेकर एक नए विवाद की गूंज सुनाई देने लगी है। इस नए विवाद को
लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की बीच बयानों की धुंआधार बल्लेबाज़ी शुरू हो गयी है। इस विवाद
की शुरुआत राष्ट्रपति के एक निमंत्रण को लेकर शुरू हुई हुई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से भेजे गए
रात्रिभोज के निमंत्रण पर मंगलवार को राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। यह विवाद तब शुरु हुआ जब
विपक्षी गठबंधन ने अपना नाम इंडिया रख लिया। दिल्ली में आयोजित जी-20 सम्मेलन के सिलसिले में
भेजे गए इस निमंत्रण पत्र में उन्हें 'प्रेसीडेंट ऑफ़ भारत' लिखा गया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि
भारत सरकार देश के नाम के तौर पर 'इंडिया' शब्द का इस्तेमाल बंद कर रही है और इसे अब केवल 'भारत'
कहे जाने की योजना है। विपक्षी दलों के इन आरोपों पर भारत सरकार या राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से
अब तक किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के
सोशल मीडिया हैंडल पर किए गए एक पोस्ट से इन ख़बरों की पुष्टि होती हुई लगती है।
भारत सरकार ने 18 से 22 सितंबर तक के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया है। मीडिया सूत्रों के हवाले से
कहा है कि संसद के विशेष सत्र में सरकार 'इंडिया' शब्द हटाने के प्रस्ताव से संबंधित विधेयक पेश कर
सकती है। भाजपा सांसद हरनाम सिंह ने कहा, 'पूरा देश मांग कर रहा है कि हमें इंडिया की जगह भारत
शब्द का इस्तेमाल करना चाहिए। अंग्रेजों ने इंडिया शब्द को एक गाली के तौर पर हमारे लिए इस्तेमाल
किया, जबकि भारत शब्द हमारी संस्कृति का प्रतीक है। मैं चाहता हूं कि संविधान में बदलाव होना चाहिए
और भारत शब्द को इसमें जोड़ना चाहिए।
देश के संविधान के अनुच्छेद-1 में ही देश के नाम का जिक्र है। इसमें कहा गया है कि "इंडिया, जो कि भारत
है, राज्यों का एक संघ होगा" (India, that is Bharat, shall be a Union of States) । संविधान में ये
इकलौता प्रावधान है जिसमें बताया गया है कि देश को आधिकारिक तौर पर क्या बुलाया जाएगा। इसी के
आधार पर हिंदी में देश को 'भारत गणराज्य' और अंग्रेजी में 'Republic of India' लिखा जाता है। 18 सितंबर
1949 को संविधान सभा की बैठक के दौरान नए बने राष्ट्र के नामकरण पर सभा के सदस्यों ने चर्चा की थी।
इस दौरान सभा के सदस्यों की तरफ से विभिन्न नामों के सुझाव आए। भारत, हिंदुस्तान, हिंद,
भारतभूमिक, भारतवर्ष। अंत में संविधान सभा ने फैसला लिया जिसमें 'अनुच्छेद-1. संघ का नाम और क्षेत्र'
शीर्षक दिया गया। अनुच्छेद 1.1 में लिखा गया- इंडिया, जो कि भारत है राज्यों का संघ होगा। अनुच्छेद 1.2
में कहा गया- राज्य और उनके क्षेत्र पहली अनुसूची में निर्दिष्ट अनुसार होंगे। संविधान सभा के कुछ सदस्यों
ने वर्तमान नाम में शामिल विराम चिह्नों पर आपत्ति जताई थी। समजवादी नेता एचवी कामथ ने संविधान
सभा में नाम को लेकर एक संशोधन पेश करते हुए कहा कि अनुच्छेद 1.1 में पढ़ा जाना चाहिए- भारत या,
अंग्रेजी भाषा में इंडिया, राज्यों का एक संघ होगा। इसके साथ ही नाम को लेकर कुछ अन्य आपत्तियां भी
थीं, लेकिन 26 नवम्बर 1949 को संविधान के साथ ही अनुच्छेद 1.1 अपने मूल रूप में पारित हो गया।
विपक्ष के अपने गठबंधन का नाम INDIA रखे जाने के बाद से इंडिया और भारत पर काफी बहस छिड़ी हुई है।
ऐसे में अब अमिताभ बच्चन का एक ट्वीट काफी वायरल हो रहा है। बिग बी ने अपने एक्स हैंडल पर एक
ट्विट किया है। इंडिया बनाम वर्सेस भारत विवाद के बीच महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने ट्वीट में
लिखा है भारत माता की जय। पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने लिखा, अब से टीम इंडिया नहीं टीम
भारत कहिए। मैं जय शाह से अपील करता हूं वर्ल्डकप में भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी में भारत नाम
लिखा जाए।