एबीपी न्यूज़ सर्वे : एक बार फिर मोदी सरकार
लोकसभा चुनाव 2024 जैसे जैसे नज़दीक आ रहे है वैसे वैसे सियासी दल अपनी रणनीति को
अंतिम रूप देने में जुट गये हैं। इस दौरान चुनावी सर्वेक्षणों की बहार भी आ रही है। निर्वाचकों
और मतदाताओं से बातचीत कर विभिन्न राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों की जीत हार के
पूर्वानुमानों के आकलन की प्रक्रिया चुनावी सर्वे कहलाती है। मुख्य तौर पर ओपिनियन पोल सर्वे
चलन में है। इसमें क्वेश्चनॉयर तैयार कर सर्वे टीम घर-घर जाती है। बाद में वोटर्स के जवाब के
आधार पर परिणाम निकाला जाता है।
एक बड़े न्यूज चैनल के हालिया सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज भी देश और
दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता बने हुए है। मोदी के आस पास भी कोई नेता नहीं फटक रहा है।
देश के एक बड़े खबरिया चैनल एबीपी न्यूज़ ने सी वोटर जैसी नामी गिरामी एजेंसी के जरिये
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए ओपिनियन पोल कराया। एबीपी सी वोटर के सर्वे के मुताबिक,
एक बार फिर देश में भाजपा सरकार बनने का अनुमान है। एबीपी न्यूज़ के लिए सी वोटर ने
2024 को लेकर पहला ओपिनियन पोल किया है जिसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं। ओपिनियन
पोल के मुताबिक, आज चुनाव होने पर सत्तारूढ़ एनडीए कुल 543 सीटों में से सबसे ज्यादा
295-335 सीटें जीतकर तीसरी बार सरकार बना सकता है। कांग्रेस को विपक्षी गठबंधन
I.N.D.I.A के साथ मिलकर 165-205 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि अन्य के खाते में 35-
65 सीटें जाती दिख रही हैं। इस ताज़ा सर्वे पर कांग्रेस सहित इंडि गठबंधन के नेता आग बबूला
हो रहे है। मीडिया के विरुद्ध अनाप शनाप आरोप लगाए जाने लगे है।
आजकल सर्वे की बहुत ज्यादा चर्चा हो रही है। जिसे चाहे वह सर्वे करवा रहा है। आखिर यह
सर्वे है क्या, इसकी जानकारी जनसाधारण को होनी बहुत जरुरी है। सीधे शब्दों में बात करें तो
किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी या किसी भी विषय पर लोगों की मन की बात जानने के लिए
लोगों के बीच में सर्वे किया जाता है, जिससे कि वहां के समाज के लोगों की क्या स्थिति है
,और वहां पर क्या चल रहा है उन सभी का हमें पता चल जाता है। कुल मिलकर लोगों के मन
की बात सर्वे के दौरान जानने की चेष्टा की जाती है। सर्वे शत प्रतिशत सही हो इसका दवा नहीं
किया जा सकता ,फिर भी सर्वे के महत्त्व से नकारा नहीं जा सकता। सर्वेक्षण एक शोध पद्धति
है जिसका उपयोग रुचि के विभिन्न विषयों में जानकारी और अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए
उत्तरदाताओं के पूर्वनिर्धारित समूह से डेटा एकत्र करने के लिए किया जाता है। उनके कई उद्देश्य
हो सकते हैं, और शोधकर्ता इसे चुनी गई कार्यप्रणाली और अध्ययन के लक्ष्य के आधार पर कई
तरीकों से संचालित कर सकते हैं। हमारे लिए सही सर्वेक्षण उपकरण का उपयोग करके लक्षित
आबादी के लिए सामाजिक अनुसंधान के लाभों को समझना आवश्यक है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया
आजकल चुनाव में बड़ी भूमिका निभाने लगे है। चुनावी सर्वे करने वाली विभिन्न संस्थाओं से
मिलकर किये जाने वाले सर्वेक्षणों में मतदाताओं का मूड जानने का प्रयास कर सटीक आकलन
किया जाता है। कई बार ये सर्वे वास्तविकता के नजदीक होते है तो कई बार फैल भी हो जाते
है। इसी के साथ खबरिया चैनलों और सर्वे एजेंसियों की साख दांव पर लग जाती है। अक्सर
देखा गया है कई बार सर्वे सटीक बैठता है तो कई बार सर्वे मन माफिक नहीं होता। फिर भी
लोग सर्वे को पसंद करते है। लोकसभा चुनाव को लेकर एक नए सर्वे के आंकड़े आये है। एबीपी
सी वोटर के चुनावी सर्वे में जो बात सामने निकलकर आई है उसके मुताबिक यदि देश में आज
चुनाव होते हैं बीजेपी अपने दम पर फिर से बहुमत का आकंड़ा पार कर लेगी। सर्वे में अभी देश
का मूड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दिख रहा है। इस ताज़ा सर्वे को देखे तो देश में महंगाई,
बेरोजगारी और विपक्ष के ताबड़तोड़ हमलों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में
कोई कमी नहीं आयी है। मोदी का जादू अभी बरकरार है। मोदी की लोकप्रियता लगातार बनी हुई
है। सर्वे में बताया गया है मोदी का जादू अभी भी मतदाताओं के सिर चढ़ कर बोल रहा है।
- बाल मुकुन्द ओझा