“घुसपैठियों पर एक्शन तय”... अमित शाह का बड़ा बयान
गुवाहाटी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को असम के श्रीभूमि जिले के पथारकंडी में एक विशाल चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केवल भाजपा ही राज्य को अवैध घुसपैठ से बचा सकती है और इसकी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित कर सकती है। अमित शाह ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "भाजपा की सरकार बना दीजिए। हमने घुसपैठियों को चिह्नित करके रखा है। अब बारी है एक-एक करके इन्हें चुन-चुन कर बाहर करने की। केवल भाजपा ही है जो करीमगंज का नाम बदलकर श्रीभूमि कर सकती है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस है जो घुसपैठियों के सहारे सत्ता हासिल करना चाहती है। मैं आज यहां से कहकर जाता हूं, राहुल गांधी कान खोलकर सुन लीजिए, हम असम को घुसपैठिया बहुल नहीं बनने देंगे। जिनकी जड़ें इटली में हो उनको श्रीभूमि का मतलब क्या मालूम होगा। प्रधानमंत्री ने असमिया और बांग्ला भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का काम किया है।" गृहमंत्री ने कहा, "हम सीएए की बात करते हैं तो कांग्रेस विरोध करती है। कांग्रेस पार्टी ने षड्यंत्र के साथ इस क्षेत्र को घुसपैठिया बहुल क्षेत्र बनाने का प्रयास किया। वोट बैंक की गंदी राजनीति कर उन्होंने 1950 के इमिग्रेंट एक्ट को समाप्त कर दिया। गोपीनाथ यह एक्ट लेकर आए थे। कांग्रेस ने 1983 में आईएमडीटी एक्ट पास कर घुसपैठियों को यहां शरण देने का काम किया। असम, बंगाल और त्रिपुरा तीनों जगह भाजपा-एनडीए सरकार बनने के साथ ही घुसपैठ बंद होगी। चुन-चुन कर हम घुसपैठियों को देश के बाहर करेंगे। ये घुसपैठिये हमारे युवाओं के रोजगार, गरीबों के राशन और चाय बागान के मजदूरों की मजदूरी छीनने का प्रयास कर रहे हैं। इन्हें देश के बाहर निकालने का काम भाजपा सरकार करेगी।"
अमित शाह ने कहा, "जब से राहुल गांधी कांग्रेस के नेता बने हैं, सभी कांग्रेस नेताओं का सार्वजनिक स्तर नीचे हो गया है। अभी दो दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि गुजरात और जो प्रांत भाजपा का समर्थन करते हैं वे अनपढ़ हैं। कांग्रेसियों को शर्म आनी चाहिए। जिस गुजरात ने दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी, सरदार पटेल, विक्रम साराभाई और पीएम मोदी जैसे नेता दिए, उस गुजरात को आप अनपढ़ कह रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि आरएसएस और भाजपा सांप हैं, इन्हें मार देना चाहिए। मैं खड़गे को कहना चाहता हूं कि मंच पर चढ़कर देखिए, हजारों की संख्या में भाजपा और आरएसएस के लोग खड़े हैं। यह लोकतंत्र की भाषा नहीं है।"