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मिलावट ने बनाया जनजीवन को जहरीला

मिलावट ने बनाया जनजीवन को जहरीला

आम आदमी महंगाई के साथ खाद्य पदार्थो में हो रही मिलावट खोरी से खासा परेशान रहता है। हमारे बीच
यह धारणा पुख्ता बनती जा रही है कि बाजार में मिलने वाली हर चीज में कुछ न कुछ मिलावट जरूर है।
लोगों की यह चिंता बेबुनियाद नहीं है। आज मिलावट का कहर सबसे ज्यादा हमारी रोजमर्रा की जरूरत की
चीजों पर ही पड़ रहा है। खाने पीने के पदार्थो में मिलावट कोई नयी समस्या नहीं है। मिलावट और खराब
उत्पाद बेचे जाने की खबरें आम हो चुकी हैं। साल-दर-साल इसका दायरा व्यापक होता जा रहा है। देशभर में
खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए शुद्ध के लिए युद्ध अभियान समय समय पर
संचालित किये जाते है। ऐसे ही एक अभियान का आगाज राजस्थान में भजनलाल सरकार ने
डबल इंजन सरकार का संकल्प के आह्वान के साथ "शुद्ध आहार मिलावट पर वार" नाम से
शुरू किया है। मिलावट के खिलाफ प्रदेशभर में यह व्यापक अभियान 15 फरवरी से प्रारम्भ
करने का ऐलान किया है, जिसमें जिला प्रशासन सहित सरकार के सभी सम्बंधित विभाग
मिलकर कार्रवाई करेंगे। सरकार ने यह ऐलान भी किया है मिलावट प्रमाणित होने पर सूचना
देने वाले को 51,000 रुपये का इनाम दिया जाएगा। राज्य के लोग मिलावट की शिकायत
हेल्पलाइन नंबर 181 पर कर सकते हैं। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा है खाद्य पदार्थों में
मिलावट एक अक्षम्य अपराध है। मिलावट के विरुद्ध कठोर कदम उठाते हुए स्वस्थ एवं समृद्ध
राजस्थान बनाने के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्ध है।
शुद्ध आहार मिलावट पर वार अभियान के तहत दूध, मावा, पनीर, आटा, बेसन, तेल, घी, सूखे
मेवे, मसालों के नमूने लेकर लैब में जांच होगी। हालाँकि ऐसे अभियान वर्षपर्यंत चलाये जाने
चाहिए। इन अभियानों की जमीनी हकीकत से सब परिचित है। बताया जाता है मिलावट और
जमाखोरी रोकने के लिए कानून तो है, मगर वे इतने प्रभावशाली नहीं हैं, जो मिलावटखोरों में
खौफ पैदा करें। सरकार को चाहिए कागजी कार्यवाही की खानापूर्ति के बजाय जनता को विश्वास
में लेकर अभियान चलाये ताकि मिलावटियों में कानून के प्रति भय उत्पन्न हो और मिलावट को
सख्ती से रोका जिसके। देखा जाता है मिलावट खोरों को पकड़ने के लिए सरकारी संसाधन
पर्याप्त नहीं है। मिलावटिये गली गली और नगर नगर में सक्रीय होकर आम आदमी की सेहत
को खराब करने में जुटे है मगर इनको पकड़ने वाली टीमें काफी कम संख्या में होने के कारण
शुद्ध के लिए युद्ध अभियान अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पा रहा है। आज स्थिति यह है
कि सरकारी तंत्र की लापरवाही और मिलीभगत, संसाधनों का अभाव, केन्द्र-राज्य मे परस्पर

सहयोग का अभाव, लचर दंड व्यवस्था का खामियाजा उपभोक्ता को चुकाना पड रहा है। आज
मिलावट का कहर सबसे ज्यादा हमारी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर ही पड़ रहा है । संपूर्ण
देश में मिलावटी खाद्य-पदार्थों की भरमार हो गई है। आजकल नकली दूध, नकली घी, नकली
तेल, नकली चायपत्ती आदि सब कुछ धड़ल्ले से बिक रहा है। सच तो यह है अधिक मुनाफा
कमाने के लालच में नामी कंपनियों से लेकर खोमचेवालों तक ने उपभोक्ताओं के हितों को ताख
पर रख दिया है। अगर कोई इन्हें खाकर बीमार पड़ जाता है तो हालत और भी खराब है, क्योंकि
जीवनरक्षक दवाइयाँ भी नकली ही बिक रही हैं। मिलावट का अर्थ है महँगी चीजों में सस्ती चीज का
मिलावट। मुनाफाखोरी करने वाले लोग रातोंरात धनवान बनने का सपना देखते हैं। अपना यह सपना
साकार करने के लिए वे बिना सोचे-समझे मिलावट का सहारा लेते हैं। सस्ती चीजों का मिश्रण कर सामान
को मिलावटी कर महंगे दामों में बेचकर लोगों को न केवल धोखा दिया जाता है, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के
साथ खिलवाड़ भी किया जाता है। मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से प्रतिवर्ष हजारों लोग विभिन्न
बीमारियों का शिकार होकर जीवन से हाथ धो बैठते हैं। मिलावट का धंधा हर तरफ देखने को मिल रहा है।
दूध बेचने और मिलावट करने वाले से लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों तक ने मिलावट के बाजार पर अपना
कब्जा कर लिया है।
सामान्य तौर पर एक परिवार अपनी आमदनी का लगभग 60 फीसदी भाग खाद्य पदार्थों पर खर्च करता
है। खाद्य अपमिश्रण से अंधापन, लकवा तथा टयूमर जैसी खतरनाक बीमारियाँ हो सकती हैं। सामान्यत
रोजमर्रा जिन्दगी में उपभोग करने वाले खाद्य पदार्थों जैसे दूध, छाछ, शहद, हल्दी, मिर्च, पाउडर, धनिया,
घीं, खाद्य तेल, चाय-कॉफी, मसाले, मावा, आटा आदि में मिलावट की सम्भावना अधिक है। मिलावट एक
संगीन अपराध है। मिलावट पर काबू नहीं पाया गया तो यह ऐसा रोग बनता जा रहा कि समाज को ही
निगल जाएगा। मिलावट के आतंक को रोकने के लिए सरकार को जन भागीदारी से सख्त कदम उठाने
होंगे। 

 -   बाल मुकुन्द ओझा 

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