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अधिवक्ताओं ने मालपुरा व देवली को नया जिला नही बनाने की मांग की

अधिवक्ताओं ने मालपुरा व देवली को नया जिला नही बनाने की मांग की

टोंक । जिला अभिभाषक संघ टोंक ने टोंक जिले के मालपुरा व देवली उपखण्ड को नया जिला नही बनाकर संपूर्ण टोंक जिले का वर्तमान स्वरुप यथावत रखने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री एवं जिला बनाओ समिति राजस्थान सरकार के चैयरमैन के नाम अतिरिक्त जिला कलेक्टर शिवचरण मीणा को ज्ञापन दिया है। संघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र शर्मा, सचिव विशाल श्रीवास्तव, महावीर तोगड़ा, देवीप्रकाश तिवाड़ी, जितेन्द्र जैन, विक्रम जैन, राजकिशोर गुर्जर, आनंद गोयल, अजय जोशी, मेघराज जाट, अक्षय बैरवा, बंसती लाल चौधरी, रतिराम पहाडिय़ा, बाबूलाल गुनसारिया, राधेश्याम चांवला, आशीष पाल, तुलसीराम चांवला, रईस अंसारी, संजय जैन, उत्तम चंद शर्मा एवं रईस अंसारी आदि अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर दिये गये ज्ञापन में बताया कि विगत दिनों मुख्यमंत्री ने राजस्थान में 19 नये जिले बनाने की घोषणा की थी, जिसके बाद टोंक जिले के मालपुरा व देवली उपखण्ड क्षेत्र के लोग अपने-अपने क्षेत्र को नया जिला घोषित करने की मांग कर रहे है। साथ ही इसको लेकर सम्पूर्ण टोंक जिले के नागरिकों की इच्छा व भावनाओं के अनुसार राज्य सरकार यदि मालपुरा या देवली क्षेत्र के लोगों की वर्तमान में की जा रही मांग को पूरी नही कर इन क्षेत्रों में नये जिले बनाने की घोषणा नहीं करती है तो सम्पूर्ण टोंक जिले का वर्तमान स्वरूप यथावत रखकर जिले के किसी भी उपखण्ड क्षैत्र या गांव या तहसील क्षेत्र को किसी अन्य घोषित नये जिले में सम्मिलित नहीं किया जाना चाहिये। उन्होंने बताया कि वर्तमान में टोंक जिला राजस्थान के मौजूदा जिलों में भौगोलिक व जनसंख्या आदि की दृष्टि से सबसे छोटा जिला हैं। टोंक जिले की वर्तमान में जनसंख्या केवल 16 लाख के लगभग है तथा यह जिला मात्र 7,194 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। जिले में केवल नौ तहसीलें एवं सात उपखण्ड है। ऐसे में राज्य में सबसे छोटे जिले में सुमार टोंक जिले के उपखण्ड देवनी व मालपुरा क्षैत्र को दूदू, केेकड़ी आदि प्रस्तावित नये  जिलो में शामिल नही कर टोंक जिले का मौजूदा स्वरूप ही बनाया रखा जाना चाहिये। ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने सम्पूर्ण टोंक जिले की जनता की ओर से मांग की है कि यदि किसी कारणवश टोंक जिले के मालपुरा या देवली उपखण्ड क्षेत्र को नया जिला घोषित करना संभव नहीं हो तो इन दोनों ही उपखण्डों के किसी भी गांव-कस्बे को दूसरे जिले में  सम्मिलित नहीं कर जिले का स्वरूप यथावत रखा जाऐ।

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