दबाव के बाद अब कनाडा का यू-टर्न !
खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाने के बाद अब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो के तेवर नरम पड़ते नजर आ रहे हैं। जानकारी देना चाहूंगा कि भारत ने कनाडा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। हाल ही में, कनाडा और भारत के बीच तल्ख होते रिश्तों के बीच अब बदलाव के संकेत देखने को मिल रहे हैं। मीडिया के हवाले से यह पता चलता है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन टूडो ने अब यह बात कही है कि भारत व कनाडा के बीच रिश्ते काफी पुराने हैं और यह बहुत ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ रिश्तों का अपना महत्व है और कनाडा रिश्तों को बेहतर बनाएगा। इस मामले में कनाडा काफी गंभीर है। वैसे कनाडा पर हर तरफ से दबाब भी इन दिनों बढ़ रहा है। जानकारी देना चाहूंगा कि एलन मस्क ने हाल ही में कनाडा सरकार की दुनिया की सबसे दमनकारी ऑनलाइन सेंशरशिप योजना लेकर यह कहा है कि जस्टिस अभिव्यक्ति की आजादी को दबा रहे हैं। यहां पाठकों को यह भी जानकारी देना चाहूंगा कि एलन मस्क स्पेसएक्स के संस्थापक और दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपतियों में से एक हैं। मस्क ने ट्रूडो सरकार की आलोचना की है। यहां यह बात महत्वपूर्ण व उल्लेखनीय है कि कनाडा के एक आदेश के तहत सभी ऑनलाइन स्टीमिंग सेवाओं को आधिकारिक रूप से सरकार के रिकॉर्ड में पंजीकृत कराने का आदेश दिया है ताकि सरकार उस पर रेगुलेटरी कंट्रोल कर सके। वास्तव में कनाडा सरकार के इस आदेश की जमकर आलोचना की जा रही है। पत्रकार और लेखक ग्लेन ग्रीनवाल्ड ने सोशल मीडिया पर इस संबंध में एक पोस्ट साझा की है, जिसमें उन्होंने यह लिखा कि कनाडा सरकार दुनिया की सबसे दमनकारी ऑनलाइन सेंशरशिप योजना लेकर आई है। वास्तव में इसके तहत सभी ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सेवाओं, जिनमें पॉडकास्ट होता है, उन्हें आधिकारिक रूप से सरकार के रिकॉर्ड में पंजीकृत कराना होगा, जिससे सरकार ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सेवाओं पर रेगुलेटरी नियंत्रण कर सके। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है कि कनाडा की ट्रूडो सरकार पर बोलने की आजादी के हनन का आरोप लगा हो। इससे पहले भी फरवरी वर्ष 2022 में भी ट्रूडो सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया था और यह कनाडा के इतिहास में पहली घटना थी। दरअसल, कोरोना महामारी के दौरान कोरोना वैक्सीन को लेने की अनिवार्यता के खिलाफ ट्रक ड्राइवरों ने विरोध प्रदर्शन किया था और उस समय इसे लेकर पूरे कनाडा में बहुत हंगामा हुआ था। तब हालात को नियंत्रित करने के लिए कनाडा सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया था। बहरहाल, जानकारी देना चाहूंगा कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में अपने अमेरिकी दौरे के दौरान यह बात कही थी कि कनाडा एक ऐसा देश बन गया है जहां भारत से संगठित अपराध, लोगों की तस्करी के साथ ही, अलगाववाद और हिंसा का मेल है।एस जयशंकर ने यह बात कही है कि कनाडा के प्रधानमंत्री ने जिस तरह निजी और सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाया वो ठीक नहीं था। उन्होंने कहा कि कनाडा को खालिस्तानियों पर लगाम लगानी चाहिए। भारत के सख्त रूख के बाद कनाडा जस्टिन ट्रूडो ने यू-टर्न लिया और कहा कि वैश्विक स्तर पर आज भारत का महत्व बढ़ रहा है, ऐसे में जरूरी है कि कनाडा और उसके सहयोगी भारत के साथ मिलकर काम करें। हैरानी की बात है कि भारत पर गंभीर आरोप लगाने के बाद अब खुद जस्टिन ट्रूडो भारत को महाशक्ति बताकर दोस्ती को नई ऊंचाई पर ले जाने की पैरोकारी कर रहे हैं। खैर जो भी हो निज्जर मामले में कनाडा की अनावश्यक आक्रामकता के बाद भारत ने एक के बाद एक कड़े व सख्त कदम उठाकर कनाडा को यह जता दिया है कि भारत पर वैश्विक दबाव चलने वाला नहीं है । यहां पाठकों को यह बताया जाना आवश्यक है कि निज्जर कनाडा में एक प्रमुख खालिस्तान समर्थक नेता था और खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) का हेड था। भारत के गृह मंत्रालय ने केटीएफ पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए विदेशी स्रोतों से फंडिंग और हथियारों के उपयोग का आरोप लगाया था। भारतीय अधिकारी कई वर्षों तक निज्जर को ट्रैक कर रहे थे। इसी साल 18 जून को कनाडा में उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। तब से निज्जर के समर्थक भारत को उसकी हत्या में शामिल बता रहे हैं। कनाडा ने भारत पर बहुत ही ग़लत आरोप लगाए हैं, जो कि ठीक नहीं है। कनाडा के आरोपों के बाद भारत ने कनाडा की कार्रवाई के जवाब में कनाडा के राजनयिकों को वापस भेजा, फिर कनाडाई नागरिकों को वीजा जारी करने पर अस्थाई रोक लगा दी थी। इसके बाद भारत ने संपूर्ण दुनिया के सामने मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा, जिसका बहुत ही सकारात्मक व जोरदार असर पड़ा। यहां पाठकों को यह भी जानकारी देता चलूं कि कनाडा के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री ने भी भारत-कनाडा के बीच तनातनी को उचित नहीं माना है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ बेहतर रिश्तों की जरूरत है। हाल फिलहाल, कहना ग़लत नहीं होगा कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोर्चा संभाला है, उससे कनाडा अपने रवैये को बदलने पर विवश होना पड़ा है। कनाडा के रवैए के बाद अब य़दि भारत-कनाडा में रिश्ते सामान्य होते हैं, तो यह दोनों ही देशों के हित में है।