एग्रीवोल्टाइक्स से किसानों की कमाई बढ़ाने की तैयारी, खेती के साथ बनेगी बिजली
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एग्रीवोल्टाइक्स से किसानों को खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन से भी कमाई का मौका मिलेगा।
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पीएम-कुसुम योजना के अगले चरण में इस तकनीक को विशेष महत्व दिए जाने की तैयारी है।
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सौर ऊर्जा से ग्रामीण रोजगार, सिंचाई और किसानों की आर्थिक मजबूती को बढ़ावा मिल सकता है।
नई दिल्ली। किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत कम करने के लिए कृषि के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को जोड़ने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसी दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक को ग्रामीण समृद्धि के लिए अहम बताते हुए इसके फायदों पर जोर दिया है। बुधवार को उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान का एक लेख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, एग्रीवोल्टाइक्स किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का रास्ता खोल सकता है। इस तकनीक के जरिए एक ही जमीन पर फसल उगाने के साथ सौर ऊर्जा का उत्पादन भी किया जा सकता है। इससे किसानों को आय के नए स्रोत मिलेंगे और बिजली पर होने वाला खर्च कम करने में भी मदद मिल सकती है।
खेती भी होगी, सौर ऊर्जा से कमाई भी
एग्रीवोल्टाइक्स को एग्रीपीवी भी कहा जाता है। इसमें खेतों में इस तरह सौर पैनल लगाए जाते हैं कि उनके नीचे या आसपास कृषि गतिविधियां जारी रखी जा सकें। सही डिजाइन और फसलों के चयन से किसान जमीन का इस्तेमाल खेती और ऊर्जा उत्पादन, दोनों के लिए कर सकते हैं।
केंद्रीय मंत्रियों प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान ने अपने लेख में बताया कि यह मॉडल खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयोगी हो सकता है। भारत में करीब 86 प्रतिशत किसान इसी श्रेणी में आते हैं। ऐसे में खेती के साथ बिजली उत्पादन से होने वाली अतिरिक्त कमाई उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मददगार हो सकती है।
पीएम-कुसुम योजना में मिल सकता है बढ़ावा
सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री-कुसुम योजना के अगले चरण में एग्रीवोल्टाइक्स को विशेष स्थान देने की तैयारी है। इससे कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को गति मिलने और सिंचाई व्यवस्था को सौर ऊर्जा से जोड़ने के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ने से किसानों की डीजल और खरीदी गई बिजली पर निर्भरता भी घट सकती है। इसके साथ ही उत्पादित बिजली को बेचने का अवसर मिलने पर किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त जरिया तैयार हो सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ स्थानीय परिस्थितियों, परियोजना की लागत और बिजली बेचने की उपलब्ध व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
फसलों को भी मिल सकता है फायदा
एग्रीवोल्टाइक्स का लाभ केवल बिजली उत्पादन और आमदनी तक सीमित नहीं है। खेतों में सौर पैनलों की सही व्यवस्था से एक अलग सूक्ष्म जलवायु यानी माइक्रोक्लाइमेट तैयार हो सकता है। इससे कुछ परिस्थितियों में फसलों को तेज धूप और अत्यधिक गर्मी के असर से राहत मिल सकती है। पानी के वाष्पीकरण में कमी आने की संभावना भी रहती है।
हालांकि, हर फसल के लिए एक जैसा मॉडल कारगर नहीं होगा। पैनलों की ऊंचाई, उनके बीच की दूरी, खेत में पहुंचने वाली धूप और सिंचाई की उपलब्धता को ध्यान में रखना जरूरी है। जरूरत से ज्यादा छाया होने पर कुछ फसलों की पैदावार प्रभावित भी हो सकती है। इसलिए स्थानीय जलवायु और फसल के अनुरूप तकनीक अपनाना महत्वपूर्ण होगा।
गांवों में रोजगार के नए अवसर
मंत्रियों ने अपने लेख में यह भी रेखांकित किया कि एग्रीवोल्टाइक्स के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। सौर पैनलों की स्थापना, रखरखाव, मरम्मत और कृषि से जुड़ी सेवाओं में स्थानीय लोगों को काम मिल सकता है। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावना है।
इस तकनीक को सफल बनाने के लिए कृषि और ऊर्जा विभागों, राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों तथा स्थानीय निकायों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत होगी। साथ ही किसानों को उपयुक्त फसलों, सिंचाई, पोषक तत्व प्रबंधन और सौर पैनलों की सही डिजाइन के बारे में जानकारी देनी होगी।
दिल्ली में एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस
भारत 21 से 23 अक्टूबर तक नई दिल्ली में सातवें एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस की मेजबानी कर रहा है। इस आयोजन की थीम 'पावरिंग द ग्लोबल साउथ' रखी गई है। सम्मेलन में कृषि और स्वच्छ ऊर्जा के समन्वय से जुड़े विषयों पर चर्चा हो रही है।
एग्रीवोल्टाइक्स को व्यापक स्तर पर अपनाया जाता है, तो यह किसानों के लिए खेती के साथ कमाई का नया विकल्प बन सकता है। इसके लिए जरूरी है कि तकनीक किसानों की जरूरतों के अनुरूप हो और उत्पादन, लागत तथा बाजार से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों का भी समाधान किया जाए।