AI बूम से शेयर बाजार को मिल सकता है 100 अरब डॉलर का बूस्ट
नई दिल्ली। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का बढ़ता कारोबार आने वाले वर्षों में शेयर बाजार की तस्वीर बदल सकता है। गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दो से तीन साल के दौरान एआई क्षेत्र की कंपनियों की संभावित लिस्टिंग से भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल मूल्यांकन में 50 से 100 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि भारत की करीब 70 मिड-टू-लेट-स्टेज निजी एआई कंपनियों में से 25 से 50 प्रतिशत कंपनियां आने वाले समय में आईपीओ ला सकती हैं। इन कंपनियों की शेयर बाजार में लिस्टिंग के समय वैल्यूएशन उनके मौजूदा अनुमानित मूल्य के औसतन चार गुना तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। हालांकि, यह एक अनुमान है और वास्तविक परिणाम बाजार की परिस्थितियों तथा कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेंगे।
गोल्डमैन सैक्स में एशिया मैक्रो रिसर्च के सह-प्रमुख और एशिया-प्रशांत इक्विटी रणनीतिकार टिमोथी मो के अनुसार, ऐसी लिस्टिंग से भारत के सार्वजनिक बाजार में एआई कारोबार से जुड़ी कंपनियों की भागीदारी बढ़ सकती है। इससे एआई वैल्यू चेन के उन हिस्सों को भी निवेशकों के सामने आने का अवसर मिलेगा, जिनका प्रतिनिधित्व फिलहाल शेयर बाजार में सीमित है।
एआई स्टार्टअप्स में निवेश तेजी से बढ़ा
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 के बाद से भारतीय एआई स्टार्टअप्स में प्राइवेट इक्विटी फंडिंग तीन गुना हो चुकी है। वहीं, कुल प्राइवेट इक्विटी निवेश में एआई की हिस्सेदारी चार गुना बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह बदलाव दिखाता है कि निवेशकों की दिलचस्पी इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ी है।
भारत अब निजी एआई फंडिंग के मामले में दुनिया के शीर्ष छह देशों में शामिल है। नई फंडिंग हासिल करने वाली एआई कंपनियों की संख्या के लिहाज से भी भारत शीर्ष चार देशों में जगह रखता है।
गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में 84 निजी कंपनियों को 'प्राइवेट एआई कंटेंडर्स' के रूप में पहचाना गया है। इन कंपनियों का कुल अनुमानित मूल्यांकन करीब 55 अरब डॉलर बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 के बाद से भारत में एआई से जुड़ी कुल निजी फंडिंग का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं कंपनियों को मिला है। ये कंपनियां एआई कारोबार के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करती हैं।
डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर में बड़ा अवसर
रिपोर्ट में एआई वैल्यू चेन के शुरुआती और आधारभूत क्षेत्रों को सबसे अहम अवसरों में शामिल किया गया है। इन्हें 'अपस्ट्रीम एआई इनेबलर्स' कहा गया है। इस श्रेणी में बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, चिप डिजाइन, क्वांटम कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर, क्लाउड सेवाएं और डेटा मैनेजमेंट से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं।
गोल्डमैन सैक्स ने इस सेगमेंट का अनुमानित मूल्यांकन करीब 35 अरब डॉलर आंका है। रिपोर्ट का अनुमान है कि भविष्य में एआई से जुड़ी कंपनियों की संभावित लिस्टिंग के कुल मूल्य में से लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा इसी श्रेणी का हो सकता है।
एआई तकनीक के विस्तार के लिए केवल सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन ही नहीं, बल्कि मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा भी जरूरी है। डेटा प्रोसेसिंग, कंप्यूटिंग क्षमता और बिजली की बढ़ती जरूरतों के कारण इन क्षेत्रों की कंपनियों के लिए कारोबार के नए अवसर बन सकते हैं।
निवेशकों के लिए अवसर के साथ जोखिम भी
एआई कंपनियों की संभावित लिस्टिंग से भारतीय शेयर बाजार में तकनीक आधारित कारोबार का दायरा बढ़ सकता है। इससे निवेशकों को एआई इकोसिस्टम के विभिन्न हिस्सों में काम करने वाली कंपनियों में निवेश के विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े संभावित परिदृश्य पर आधारित हैं, न कि भविष्य में होने वाली लिस्टिंग या मूल्यांकन वृद्धि की गारंटी।
कंपनियों की वास्तविक कमाई, कारोबार की स्थिरता, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और बाजार की स्थिति यह तय करेंगे कि एआई से जुड़े अवसर कितने बड़े साबित होते हैं। फिलहाल, रिपोर्ट भारत के एआई स्टार्टअप इकोसिस्टम और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे में बढ़ती निवेश संभावनाओं की ओर संकेत करती है।