Dark Mode
अलायंस क्लब द्वारा स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की गई

अलायंस क्लब द्वारा स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की गई

 
 नवलगढ़ .  नवलगढ़ के एस एन बी.एड कॉलेज परिसर में स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि पर श्रदांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अतिथियों द्वारा स्वामीजी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि दी गई। कार्यक्रम मे पूर्व  अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दयाषंकर जांगिड, एस एन स्कूल के प्राचार्य नवीन कुमार शर्मा,  एस एन बी.एड कॉलेज प्राचार्या डॉ तारा सैनी, प्रांतपाल जगदीष प्रसाद जांगिड, पूर्व प्रांतपाल मेजर डीपी शर्मा, जनार्दन घोडेला, मुरली मनोहर चोबदार प्रधान भारत स्काउट गाइड, पंकज शाह, शोयब लंगा, सुषील कुमार, प्रदीप सैनी व कॉलेज व स्कूल के स्टाफ सदस्य तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्राचार्य नवीन कुमार ने विवेकानंद जी के जीवन पर अपने विचार प्रकट करते हुये कहा कि युवाओ को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिये। प्रांतपाल जगदीष प्रसाद जांगिड ने भी विवेकानंदजी के जीवन पर प्रकाष डाला। मेजर डीपी शर्मा ने अपने उदबोधन मे कहा कि स्वामीजी आध्यात्म के पुरोधा थे, देष के प्रति निष्ठा थी। उन्होने सनातन धर्म को पूरी दुनिया में फैलाया। पूरी दुनिया को हिंदू धर्म के बारे मे जानकारी दी। मुरली मनोहर चोबदार ने कहा कि स्वामीजी का चरित्र अद्धितीय था। उनके उपदेषों को हमे ग्रहण करना चाहिये। डॉ जांगिड ने कहा कि हमारे क्लब द्वारा एक मुस्लिम द्वारा प्रदत यह मूर्ति साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल है। हमारे क्लब का उदेष्य है कि विद्यार्थी विवेकानंद जी के जीवन से प्रेरणा लें और अपने जीवन को उज्जवल बनाये। आपने कहा कि खेतड़ी नरेष अजीतसिंह का भी उनको जग प्रसिद्ध करने में बहुत योगदान रहा। पहले स्वामीजी का नाम नरेन्द्र कुमार था। विवेकानंद नाम भी खेतड़ी नरेष ने दिया। जो वेषभूषा वे पहनते थे वो भी उन्ही के द्वारा बनवाई गई थी। उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी। इसका आभास अजीतसिंह जी को हो गया था उन्होने स्वामीजी को सहयोग कर विष्व धर्म सम्मेलन मे षिकागो भेजा। स्वामीजी तीन बार खेतड़ी आये और वहां 52 दिन प्रवास किया। खेतड़ी मे उनकी याद मे बडे बडे कार्यक्रम होते है तथा एक संग्रहालय की भी स्थापना की है। बड़े बडे धर्मगुरू विवेकानंद को कमजोर समझते थे। हमारे धर्म को भी कमजोर मान रहे थे। बड़े प्रयत्नों से उनको पांच मिनट बोलने का समय मिला। उनका भाषण सुनकर सभी लोग दंग रह गये। हॉल तालियों से गूूंज उठा। उन्होने भारतीय सनातन धर्म व हिंदत्व की व्याख्या कर सबको अचभित कर दिया। हिंदू धर्म को दुनिया वाले मानने लगे। आज भी हमे सनातन धर्म व हिंदत्व की बहुत ज्यादा जरूरत है देष को विष्व गुरू बनाना है उन्होने विदेषो तथा पूरे बंगाल मे संस्थाएं बनाई जो उनके आदर्षो को प्रतिभूत करती है। विधि की विडंबना है अच्छे लोग कम जी जीवित रहते है। उनका तो 39 वर्ष की आयु मे ही मस्तिष्क की नस फटने से ध्यान करते करते देहांत हो गया।
 
 
 

Comment / Reply From

You May Also Like

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!