चुंटीसरा के सरकारी स्कूल में आर्चरी की कक्षाएं
डेह. नागौर के रा उ मां विद्यालय चुंटीसरा में कथा एनजीओ ने तीरंदाजी सिखाने की एक सार्थक यात्रा शुरू की। इस पारंपरिक खेल को फिर से शुरू करके बच्चों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए खेल को शिक्षा मॉडल में शामिल करने का लक्ष्य रखा। तीरंदाजी का राजस्थान में एक समृद्ध इतिहास है, जो इसकी योद्धा संस्कृति में गहराई से निहित है।
आज बच्चों को तीरंदाजी की कला सिखाकर, लड़कियों को सशक्त बनाकर लैंगिक समानता को बढ़ावा देकर और रूढ़ियों को तोड़कर इस विरासत का जश्न मनाते हैं। तीरंदाजी के माध्यम से, बच्चे मूल्यवान जीवन सबक सीखते हैं और आत्मविश्वास हासिल करते हैं, सशक्तिकरण और आत्म-विश्वास की भावना को बढ़ावा देते हैं। कथा एनजीओ का मानना है कि यह पहल एक स्थायी प्रभाव छोड़ेगी, आत्मविश्वास और सशक्त व्यक्तियों का पोषण करेगी जो सामाजिक मानदंडों को चुनौती देते हुए अपनी विरासत का अपनाते हैं। इससे पहले कथा एनजीओ ने इस स्कूल में कंप्यूटर लैब, स्मार्ट लाइब्रेरी और स्मार्ट क्लासेस स्थापित किया है सभी बच्चों को बैग,कॉपी, पेंसिल और अन्य सामान वितरित किया I कथा ने तीन शिक्षक भी प्रदान किए है I जो बच्चों और शिक्षकों को प्रौद्योगिकी और कहानी शिक्षण, कला और संस्कृति पर प्रशिक्षण दे रहे हैं , ताकि सरकारी स्कूल के शिक्षक नई शिक्षा नीति 2020 के दिशानिर्देशों को पूरा करने के लिए तकनीक आधारित शिक्षण करवा सकें। यह शैक्षिक पहल वैश्विक कंपनी 'हर्बालाइफ' द्वारा समर्थित और सुश्री परविंदर कौर, कार्यकारी निदेशक के मार्गदर्शन में बच्चों का सर्वांगीण विकास और सरकारी स्कूलों के बच्चों और शिक्षकों को 21 वीं सदी के कौशल की पूर्ति की दिशा में काम कर रहे हैं
I. प्रधानाचार्य गोविंद भाटी ने कथा डायरेक्टर डा आनंद सिंह राना,कथा प्रीतिनिधि भगवान सिंह एवम कथा शिक्षकों को एनईपी 2020 के उद्देश्यों और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एवम समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया। 1988 में स्थापित "कथा" विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त गैर-लाभकारी संस्था है, जो 19 राज्यों में कार्यरत है। जिसका उद्देश्य कहानियों और खेल पद्धति से विशेषतः पिछड़े समुदायों के गरीब बच्चों का शैक्षिक उन्नयन है। पिछले 34 वर्षों में कथा ने 10 मिलियन से अधिक बच्चों तक पहुंच बनाई है l इस मौके पर विद्यालय के स्टाफ श्री सुरेश कुमार मनोज कुमार, राम कुमार, सत्यनारायण ,अनिल कुमार, हीरालाल ,परमेश्वर , जयकरण ,जगराम ,महिपाल लक्ष्मी ,रामी ,राधा ,जमीला, पुष्पलता, ओमप्रकाश ,इत्यादि मौजूद रहे।