विधानसभा स्पीकर बोले- मुझे धृतराष्ट्र कहते हो, ये शर्मनाक:नेता प्रतिपक्ष जूली ने माफी मांगी; डोटासरा ने कहा- थोड़ी इनायत हमारी तरफ रखिए
जयपुर..नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के स्पीकर वासुदेव देवनानी को धृतराष्ट्र कहने के मामले में सदन में जमकर हंगामा हुआ। इस कारण विधानसभा की कार्यवाही को स्पीकर ने पहले एक घंटे और फिर आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया।
हालांकि बाद में विधानसभा में गतिरोध दूर हो गया। अब सदन में स्वास्थ्य की अनुदान मांगों पर बहस चल रही है। विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी ने सदन में गतिरोध दूर होने के बाद कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी के ठाकुर का कुआं कविता पढ़ने, नेता प्रतिपक्ष और मंत्री अविनाश गहलोत की टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से निकालने के आदेश दिए।
दरअसल, आज शून्यकाल की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष ने कल अनुदान मांगों पर जवाब के दौरान हुए हंगामे और मंत्रियों के आचरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कल जिस तरह मंत्रियों ने आचरण किया, असंसदीय शब्द बोले उन्हें कार्यवाही से नहीं निकाला, इसलिए बाहर जाकर बोलने की नौबत आई।
जूली ने कहा कि अध्यक्षजी, आपका झुकाव विपक्ष की तरफ रहना चाहिए, लेकिन हम देखते हैं आपका झुकाव सत्ता पक्ष की तरफ रहता है। इस पर स्पीकर ने कहा कि तो क्या आप आसन को धृतराष्ट्र कहेंगे। मुझे आपने धृतराष्ट्र कहा, आसन के प्रति इस तरह की टिप्पणी शर्मनाक है। इस पर माफी मांगनी चााहिए। इसके बाद जूली ने अपने बयान के लिए माफी मांग ली।
सीकर से कांग्रेस विधायक राजेंद्र पारीक ने कहा कि पिछले कुछ सालों में इतनी योजनाएं लागू हो गई है कि आमजन गुमराह हो गया है। पहले भामाशाह, फिर चिंरजीवी, उसके बाद आयुष्मान योजना और अब मां योजना आ गई।उन्होंने चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से कहा कि सरकार को एक नोटिफिकेशन निकालकर आमजन को बताना चाहिए कि अभी यह योजना चल रही है और इसमें इस-इस तरह की सुविधा मिलेगी। इस पर चिकित्सा मंत्री ने कहा कि नाम बदलने की शुरुआत तो आपने की थी।
कांग्रेस विधायक बोले- अफसरों के भरोसे कोई चुनाव नहीं जीता जा सकता
कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार ने कहा कि अफसरों के भरोसे कोई चुनाव नहीं जीता जा सकता है। अफसर तो अवसरवादी है। गहलोत चुनाव जीते तो वसुंधरा की तस्वीर हटा दी। इस बार भजनलाल शर्मा की लगा दी। अगर अफसरों के भरोसे राज करना चाहोगे तो नहीं कर पाओगे। जनता के भरोसे ही राज कर सकते हो। उन्होंने कहा कि हमारे परसादीलाल मीणा भी नशे में थे, 50 हजार से चुनाव हार गए।
श्रवण कुमार ने चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से कहा कि आप तो राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने चाहिए थे। जैसा काम आप कर रहे हो। आपकी पार्टी के लोग भी आपसे गलत काम करना चाहेंगे। आप पर दबाव भी आएगा, लेकिन आप हिम्मत से काम लेना। आपको डॉक्टर्स को कंट्रोल करना होगा। डॉक्टर्स सिफारिश से सीएमएचओ, ब्लॉक सीएमएचओ लग जाते हैं, लेकिन इन्हें प्रशासनिक अनुभव नहीं होता है। यह क्या काम करेंगे।
उन्होंने कहा- आज डॉक्टर्स के घर पर मरीज बैठे रहते हैं, जबकि अस्पताल खाली रहते है। अस्पतालों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। आपको अस्पतालों का निरीक्षण भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर जिले में मेडिकल कॉलेज है, लेकिन गरीब के बच्चे को डोनेशन देकर एडमिशन लेना पड़ता है। सत्ता पक्ष कहता है कि मोदी जी ने वैक्सीन लगवाई तो उस वैक्सीन से होने वाले हार्ट अटैक की भी जांच होनी चाहिए। गहलोत ने 25 लाख का बीमा करवाया, लेकिन उसमें भी भ्रष्टाचार होता था।
डोटासरा ने की देवनानी की तारीफ, बोले- थोड़ी इनायत हमारी तरफ रखिए
विधानसभा में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने स्पीकर वासुदेव देवनानी की तारीफ करते हुए कहा कि जब आपका नाम स्पीकर के तौर पर आया तो हम सबने कहा था कि सुलझे हुए व्यक्ति को चुना है। जब से आप स्पीकर बने हैं, आपने पक्ष और विपक्ष सबका ध्यान रखा है। इस चेयर का सम्मान है और चेयर का सम्मान रहना चाहिए। पूरे प्रतिपक्ष की ओर से आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि चेयर की गरिमा हमारी गरिमा है। इसको हम बनाकर रखेंगे कभी भी इसमें कोताही नहीं आएगी
डोटासरा ने कहा- संसदीय कार्य मंत्री ही जब यह कहें कि बार-बार नेता प्रतिपक्ष खड़े होकर बात कहेंगे तो इज्जत नहीं रह पाएगी, यह उचित नहीं है। डोटासरा ने देवनानी से कहा- चेयर का पूरा सम्मान रहेगा। आप भी थोड़ी बहुत इनायत किया करो साहब, हमारे तो आप ही हैं। हमारी तो आप ही सुनते हो, हमारी मुख्यमंत्री और मंत्री थोड़े ही सुनते हैं।
देवनानी बोले- सदन में एक-दूसरे का सम्मान करें, नहीं तो हमारे बच्चे भी हमारा सम्मान नहीं करेंगे
विधानसभा में गतिरोध दूर होने के बाद स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कहा कि मेरी राजनीति में रुचि नहीं थी, फिर भी राजनीति में आया तो हर किसी के साथ समानता का व्यवहार किया। स्पीकर बनने के बाद भी मैंने सबका ध्यान रखा। घर परिवार में भी यह होता है कि बड़े बेटे को लगता है कि छोटे का ज्यादा ध्यान रखते हो, यही सदन में भी होता है।
उन्होंने कहा- पक्ष-विपक्ष को भी यह लग सकता है। पक्ष और विपक्ष के सभी विधायक भी नियम परंपराओं का ध्यान रखें। हम बड़ों और दायित्वों का सम्मान नहीं करेंगे तो हमारे बच्चे भी हमारा सम्मान नहीं करेंगे। अगर कोई बात हो तो मेरे चैंबर में आकार बात कर लीजिए, समाधान हो जाएगा।
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान प्रशासन शहरों के संग अभियान में जारी पट्टे और जमीन आवंटन की नीति से जुड़े सवाल पर कांग्रेस विधायक रोहिता बोहरा और यूडीएच मंत्री झाबरसिंह खर्रा के बीच जमकर नोकझोंक हो गई।
यूडीएच मंत्री खर्रा ने कहा कि अभियान में धौलपुर में 5241 पट्टे जारी हुए हैं। धौलपुर में पांच साल में कई कारनामे हुए हैं। करीब 31 लाख रुपए बैंक से निकल गए, लेकिन विभाग में काम ही नहीं हुआ। धौलपुर में पांच साल में शहरी निकाय में गड़बड़ियां हुई हैं।
मंत्री के जवाब पर रोहित बेाहरा ने कहा कि मंत्री धमका रहे हैं। हम आपसे धमकेंगे नहींं। जो सवाल पूछा है उसका जवाब नहीं दे रहे हो। सवाल पूछा तो मिर्ची लग गई।
आप बताइए किस नीति के जरिए अब और पिछली सरकार ने जमीनें अलॉट की। इस पर मंत्री ने लिस्ट दिखाते हुए कहा कि आप ले लीजिए, यह पूरी पांच साल की लिस्ट है। इस पर बोहरा ने कहा कि मुझे लिस्ट नहीं चाहिए, लिस्ट मैं सदन की पटल से ले लूंगा, आप जवाब दीजिए।
यूडीएच मंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडलीय एंपावर्ड कमेटी ने आवंटन किया है, अब उसकी समीक्षा चल रही है, जो गलत होगा की बैठक में जमीन आवंटन का फैसला हुआ, उसी के हिसाब से आगे फैसला होगा।