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ऑस्ट्रेलियाई PM बोले- संसद के पास नहीं बनेगी रूसी ऐंबैसी

ऑस्ट्रेलियाई PM बोले- संसद के पास नहीं बनेगी रूसी ऐंबैसी

ऑस्ट्रेलिया ने जासूसी के शक में रूस को अपनी संसद के पास ऐंबैसी बनाने से रोक दिया है। गुरुवार को इसे लेकर संसद में कानून भी पारित कर दिया गया। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि उनके देश की इंटेलिजेंस एजेंसी की सलाह पर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया है। साथ ही उस जमीन पर रूस की लीज को भी खत्म कर दिया गया है। रूस ने ऑस्ट्रेलिया के इस कदम पर विरोध जताया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा- ऑस्ट्रेलिया लगातार पश्चिमी देशों के कहने पर चल रहा है जो रूस के खिलाफ दुष्प्रचार करते हैं और नफरत फैलाते हैं। वो उनके सामने अपनी छवि बेहतर करना चाहता है। रूस इसका बदला जरूर लेगा। AFP के मुताबिक, इससे पहले रूस के डिप्लोमैट्स ने मामले में लीगल एडवाइस लेने की बात कही थी।

PM अल्बनीज बोले- अंतरराष्ट्रीय कानून की बात न करे रूस
नए कानून के मुताबिक, रूस को लीज के बदले फाइनेंशियल कॉम्पेंसेशन मिल सकता है। हालांकि, उसका मौजूदा दूतावास इस कानून के दायरे में नहीं आएगा। रूस की ऐंबैसी के कंस्ट्रक्शन को रोकने लिए ऑस्ट्रेलियाई सांसद में 5 मिनट के अंदर कानून पेश करके पास कर दिया गया। PM अल्बनीज ने कहा- रूस इस वक्त अंतरराष्ट्रीय कानूनों के बारे में सवाल पूछने की स्थिति में नहीं है। उसने यूक्रेन पर अनैतिक तरह से हमला करके और 16 महीने की जंग के दौरान कई कानून तोड़े हैं।

विपक्ष बोला- हम देश की सुरक्षा को लेकर एकजुट
ऑस्ट्रेलिया में विपक्ष के नेता पीटर डट्टन ने कहा कि हम रूस की तरफ से खतरे को देखते हुए एकजुट हैं। हम ये नहीं बर्दाश्त करेंगे कि कोई दूसरा देश हमारी जासूसी करे या हमारी सुरक्षा में खतरा बने। हम किसी को भी देश की चुनाव प्रक्रिया में दखलंदाजी नहीं करने देंगे।

ऑस्ट्रेलियाई संसद से सिर्फ 400 मीटर की दूरी पर ऐंबैसी बनाना चाहता है रूस
दरअसल, 2008 में मॉस्को ने कैनबरा में संसद भवन से सिर्फ 400 मीटर की दूरी पर जमीन को लीज पर लिया था। तब से ही यहां पर ऐंबैसी का निर्माण जारी है। हालांकि, ये बहुत ही धीमी गति से चल रहा था। रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से ही ऑस्ट्रेलिया लगातार यूक्रेन की मदद करता रहा है। उसने NATO और अमेरिका के साथ मिलकर कई बार रूस के कदमों का विरोध जताया है। वो यूक्रेन को जंग में कई मिलिट्री हार्डवेयर, हथियार और बाकी जरूरी सामान दिए हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया यूक्रेन के जवानों को ट्रेनिंग भी देता आया है।

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