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आजादी के दीवाने थे आजाद - प्रधानाचार्या मनोज कंवर

आजादी के दीवाने थे आजाद - प्रधानाचार्या मनोज कंवर

 

 
 
 
 
परबतसर कस्बे के जीनियस स्कूल में चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर प्रधानाचार्या मनोज कंवर राठौड़ ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद वास्तव में आजादी के दीवाने थे। उन्होंने अपनी खुद की परवाह को दरकिनार करते हुए देश को स्वतंत्र करवाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित के दिया। संस्था निदेशक लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने बताया कि विद्यालय में महापुरुषों से जुड़े हुए विशेष आयोजनों को मनाने से बालको में अपने देश व इन महापुरुषों के प्रति गर्व की भावना प्रबल होती है। वर्तमान समय को देखते हुए प्रत्येक बालक में देशप्रेम की भावना का विकास करना अत्यावश्यक है। विद्यालय के निदेशक लक्ष्मण सिंह राठौड़, प्रधानाचार्या मनोज कंवर व सभी अध्यापको ने चंद्रशेखर आजाद के चित्र पटल पर दीप प्रज्वलित करते हुए पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इतिहास व्याख्याता विशेष कुमावत ने चंद्रशेखर आजाद की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत की आन बान शान के प्रतीक, मातृभूमि के सच्चे सपूत, जिनके नाम से अंग्रेजी सल्तनत बौखलाया जाया करती थी, हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से भेष बदलने वाले महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद को 27 फरवरी 1931 को अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजी शासन ने धोखे से घेरकर उनको अपने बस में करने की कोशिश की थी और चंद्रशेखर आजाद ने अपने लिए हुए वचन आजाद था, आजाद हु, आजाद रहूंगा को बनाए रखने के लिए स्वयं को मातृभूमि को अंतिम शब्द कहते हुए कि है भारत माता मुझे माफ करना, मैं तेरी इतनी ही सेवा कर सका और स्वयं को गोली मार ली और अपने वचन को सिद्ध कर दिया। ऐसे वीर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद जो इतिहास में आजाद के नाम से प्रसिद्ध हुये। इस अवसर पर राष्ट्र के प्रति समर्पित उनकी भावनाओं को बच्चों के समक्ष बताया गया । इस अवसर पर पृथ्वीराज चौहान व स्वामी विवेकानंद युवा मंडल के सदस्य भी उपस्थित रहे।

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