बाड़मेर : शुरू हुआ डायरिया नियंत्रण अभियान, दवा के साथ जागरूकता भी : सीएमएचओ डॉ. बिश्नोई
- आमजन से अपील, बारिश के दौरान अपने बच्चों को रखें विशेष ख्याल
बाड़मेर। जिले में बच्चों को डायरिया (दस्त) से बचाने के लिए डायरिया नियंत्रण अभियान शुरू किया गया है, जो आगामी 15 अगस्त तक चलाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य लक्ष्य डायरिया से होने वाली बीमारियों और मृत्यु दर को कम करना है। विशेष रूप से पांच साल से कम उम्र के बच्चों में डायरिया के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण पाना इस अभियान की प्राथमिकता रहेगी। सीएमएचओ डॉ. विष्णुराम विश्नोई के निर्देशन में डीपीसी राकेश भाटी और मूलशंकर दवे द्वारा अभियान के तहत आँगनवाड़ी केन्द्र वार्ड 26 में पाँच वर्ष से छोटे बच्चो को ओआरएस एवं जिंक टेबलेट वितरण कर अभियान की जानकारी दी गई ! एमएचओ ने बताया कि जिले में स्टॉप डायरिया अभियान की विधिवत शुरुआत कर दी गई है और अभियान को लेकर सभी खंड में विशेष गतिविधियां की जा रही हैं। साथ ही जिलास्तर से भी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि पांच वर्ष से कम बच्चों की मृत्यु का 4.8 प्रतिशत कारण दस्त संबंधित रोग होते हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। दस्त से होने वाली मृत्यु दर को शून्य करने के लिए ही 15 अगस्त तक स्टॉप डायरिया अभियान चलाया जाएगा। जिसकी थीम "डायरिया की रोकथाम, सफाई और ओआरएस से रखें अपना ध्यान" तय की गई है।आरसीएचओ डॉ भवानी शंकर गहलोत ने बताया कि यह अभियान समुदाय को डायरिया के प्रति जागरूक करने और इसके बचाव व उपचार के तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लोगों को डायरिया के लक्षण, कारण और बचाव के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देंगे। इसमें व्यक्तिगत स्वच्छता, साफ पानी पीने और भोजन को सुरक्षित रखने के तरीकों पर जोर दिया जाएगा।निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) डायरिया की सबसे गंभीर जटिलता है। डीपीएम सचिन भार्गव ने बताया कि अभियान के दौरान ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट) के पैकेट निशुल्क बांटे जाएंगे और लोगों को इसे सही तरीके से घोलकर पिलाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। साथ ही बच्चों में डायरिया की अवधि और गंभीरता को कम करने के लिए जिंक सप्लीमेंट के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। आमजन को खाना बनाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने के महत्व के बारे में बताया जाएगा। सुरक्षित पेयजल के लिए पानी को उबालकर पीने या क्लोरीन की गोलियों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन भी किया जाएगा, जहां डायरिया के लक्षणों वाले मरीजों की जांच की जाएगी और उन्हें तुरंत उपचार प्रदान किया जाएगा। जिला कार्यक्रम समन्वयक राकेश भाटी ने बताया कि गर्मी और बरसात के मौसम में दूषित पानी और भोजन के कारण डायरिया जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। यह अभियान ऐसे समय में शुरू किया जा रहा है जब इन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। डायरिया, विशेष रूप से छोटे बच्चों में, गंभीर निर्जलीकरण का कारण बन सकता है और यदि समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए बताई गई सावधानियों का पालन करने की अपील की है। कार्यक्रम के दौरान आशा सहयोगिनी लता वासु, कमला , एएनएम मीना सैन, सहायिका संचल व गीता तथा बच्चे एवं परिजन आदि उपस्थित रहे।