सावधान, कोरोना अभी गया नहीं है
कोरोना अभी गया नहीं है । देश में दिन प्रतिदिन कोरोना के मामलों में हो रही बढ़ोत्तरी ने देशवासियों की
चिंता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों की बैठक बुलाकर कोरोना की मौजूदा स्थिति का
जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए की कोरोना अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है, इसलिए
किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पिछले हफ्ते के आंकड़े के
मुताबिक दुनिया में 93977 मामले रोज़ाना आ रहे हैं। अमेरिका में 19 प्रतिशत , रूस में 12.6 प्रतिशत, चीन
में 8.3 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया में 8 प्रतिशत और भारत में एक प्रतिशत मामले रिपोर्ट हो रहे हैं। सरकार ने
कहा कि दुनिया में छह लहर तक आई हैं और भारत में ही हमने तीन लहर देखी हैं। देश में पिछले 24 घंटों में
कोरोना के डेढ़ हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक लाख टेस्ट रोजाना हो रहे हैं। महाराष्ट्र,
गुजरात ,केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली, हिमाचल और राजस्थान में सबसे ज्यादा मामले फिलहाल
दर्ज हो रहे हैं। इसी के साथ सुरक्षात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए है। सरकार ने एडवाइजरी जारी कर मास्क
के साथ दो गज की दूरी की सलाह दे दी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना से बचने का सबसे बेहतर तरीका है कि संक्रमित व्यक्ति से दूरी
बनाकर रखी जाए। मौसम लगातार बदल रहा है। कभी गर्मी कभी बारिश ने मौसमी बीमारियों को आमंत्रण
दे दिया है। ऐसे माहौल में सर्दी जुकाम के केस बढ़ रहे है। इसलिए जिस भी व्यक्ति को खांसी या जुकाम हो
उससे दूरी बनाकर रखें। मास्क लगाएं खासकर भीड़ वाली जगह पर। छींकने या खांसने पर हाथों को
सैनिटाइज करना न भूले। अपने हाथों को समय-समय पर साबुन से धोएं। हालाँकि भारत में बड़ी संख्या में
वैक्सीन लगने के बाद खतरा कम हो गया है फिर भी सावधानी जरूरी है। मौसम में बदलाव के कारण सर्दी,
खांसी, जुकाम और बुखार जैसी बीमारियां लोगों को परेशान कर रही हैं। वायरल बुखार की समस्या होने पर
कुछ सावधानियां को बरता जाए तो यह चार से छह दिन में अपने आप ठीक हो जाएगा, लेकिन इन-दिनों
कोरोना का भी लोगों को डर सताने लगा है। मौसम में हो रहे बदलाव के कारण कफ, कोल्ड, फीवर, गले में
खराश, खांसी, सिर में दर्द आदि समस्याएं होना एक आम बात है, लेकिन यह जरुरी नहीं है की सभी लोग
कोरोना संक्रमण के शिकार हो।
देश के अनेक राज्यों में बारिश हो रही है। गर्म और ठन्डे मौसम में लोगों के समक्ष यह दुविधा उत्पन्न हो
जाती है की आखिर कोरोना को कैसे पहचाने। कुछ लोग बदलते मौसम में बुखार की चपेट में आने से घबराये
हुए है। कोरोना वायरस की सबसे खतरनाक बात ये है कि इसके लक्षण आम सर्दी-जुकाम या कॉमन एलर्जी
से इतने मिलते-जुलते है। विशेषज्ञों के अनुसार कॉमन एलर्जी में इंसान को खांसी जुकाम जरूर होते हैं,
लेकिन उसे बुखार नहीं चढ़ता जबकि कोरोना पीड़ित में तेज बुखार की शिकायत देखी गई है। दूसरा, कोरोना
वायरस के रोगियों में बदन दर्द और जोड़ों में दर्द की समस्या देखी गई है. जबकि आम सर्दी-जुकाम में बदन
टूटा-टूटा रहता है, लेकिन उसमें तेज दर्द की शिकायत नहीं होती है।
कोरोना संकट में प्रकृति और ऋषि मुनियों द्वारा अपनायी जाने वाली देशी चिकित्सा ने हमारा ध्यान खिंचा
है। कोरोना में सर्दी, जुकाम, खांसी, गले में खराश आम बात है। दादी नानी के नुस्खों ने इनका उपचार भी
हमें बताया है। ये नुस्खे इतने ज्यादा कारगर हैं कि डॉक्टर और मेडिकल साइंस भी उन्हें मानने से मना नहीं
करते हैं। हल्दी वाला दूध हो या नमक मिले गरम पानी के गरारे कोरोना के जुकाम और गले दर्द में दोनों ही
कारगर इलाज है। अदरक को पानी में उबालकर और फिर शहद के साथ खाया जाए तो यह कफ, गले में
खराश और गला खराब होने की दिक्कत से छुटकारा दिला सकती है। अदरक को शहद के साथ खाने से गले
में होने वाली सूजन और जलन में भी राहत मिलती है। इसी भांति अजवायन, लोंग, काली मिर्च, तुलसी
गिलोय, मलेठीयुक्त पान, शहद, दालचीनी आदि के नुस्खे भी संजीवनी साबित हुए है। उल्टा लेटकर
ऑक्सीजन प्राप्त करने के नुस्खे को एलोपेथी की मान्यता मिली है। इन नुस्खों का उपयोग कर लाखो लोग
कोरोना के प्रारंभिक लक्षणों से बाहर निकलने में कामयाब हुए है। यही नहीं इनमें से ज्यादातर नुस्खों का
कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।
बाल मुकुन्द ओझा