भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमूर्ति है भागवत - राधेश्याम शास्त्री
सुजानगढ़। अग्रसेन भवन में मोर परिवार द्वारा स्व. नर्बदा देवी एवं स्व. बाबू लाल मोर की पावन स्मृति में चल रही श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के तीसरे दिन पर व्यासपीठ से भागवताचार्य राधेश्याम शास्त्री ने ध्रुव चरित्र, पृथु चरित्र, भूगोल खगोल नाम महिमा, प्रह्लाद चरित्र, गंगा की महिमा आदि का वर्णन करते हुए बताया कि भागवत साक्षात भगवान श्री कृष्ण की प्रति मूर्ति है। ध्रुव की मां ने कहा कि बेटा जीवन में कभी किसी का बुरा नही सोचना चाहिए, जो बुरा सोचते है उन्ही का बुरा होता है। मनुष्य जीवन की पहली गुरु मां ही होती है। भागवत में नारद जी ने कहा है मनुष्य जीवन में अपनो से बड़ों का सम्मान, छोटो पर दया और बराबर वालों से मित्रता करने से कभी मन अशांत नही होगा। मुख्य यजमान विजय कुमार मोर, जगदीश प्रसाद मोर व राकेश कुमार मोर ने सपत्नीक व्यासपीठ एवम भागवत जी की पूजा अर्चना कर आरती की। संयोजक संदीप मोर ने बताया कि नारद मुनि एवम नरसिंह भगवान की झांकी सजाई गई। कथा में श्याम सुन्दर मोर, सुरेश मोर, अंकित मोर, मनीष मोर, महावीर मिरनका, मुरारी फतेहपुरिया, अरविन्द जालान, सुन्दर गौरीसरिया, धर्मेंद्र खेतान, रामकिशन गौरीसरिया, जितेंद्र मिरनका, श्याम सुन्दर गाड़ोदिया, राम लाल बगड़िया, श्याम सुन्दर रामगढ़िया, कमल पोद्दार, सांवरमल अग्रवाल, बुद्धि प्रकाश सोनी,भगवती प्रसाद शर्मा, हुलास खाती सहित अनेक महिलाएं एवम पुरुष उपस्थित थे।