सामाजिक कुप्रथा बताकर मृत्यु भोज का किया बहिष्कार
बुजुर्गों ने भोज को परंपरा एवं मृतक आत्मा के लिए शांति कर्म बताया
चाकसू : उपखंड क्षेत्र के कोटखावदा तहसील के रलावता गांव में युवा वर्ग ने मृत्यु भोज को सामाजिक कुप्रथा बताकर भोज का बहिष्कार किया है । वहीं स्थानीय बुजुर्गों ने भोज को परंपरा एवं मृतक आत्मा के लिए शांति कर्म बताया है । आसपास क्षेत्र के युवाओं ने अपना तरक देकर न केवल मृत्यु भोज का बहिष्कार किया बल्कि बुजुर्गों को भी इसे कुप्रथा मानने के लिए विवश कर दिया गया है । वहीं रलावता निवासी शंकरलाल मीणा के पिताजी का कुछ दिनों पहले देहात हो गया था । और वही संस्कार के कुछ दिन बाद ही सामाजिक परंपरा के अनुसार पितृ भोज के लिए समाज के बुजुर्ग लोगों की बैठक बुलाई गई जहां युवा वर्ग ने मृत्युभोज को सामाजिक कुप्रथा बताकर भोज का बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया था । नव युवकों ने कहा कि ऐसे मौके पर जरूरतमंदों के बीच मृत्यु भोज पर खर्च की जाने वाली राशि से मृतक के नाम से समाज में किसी धरोहर के निर्माण का फैसला लिया जाना उचित साबित होना चाहिए । ताकि आने वाले वक्त में भी समाज के बीच में यही उदाहरण पेश कर मृत्यु भोज रोकने का प्रयास होगा और स्थानीय युवाओ का ऐसे कदम समाज के लिए सराहनीय साबित हो रहे हैं । वही रलावता निवासी शंकर लाल मीणा हाईकोर्ट में कार्यरत वह उनकी धर्मपत्नी शांति देवी मीणा राजस्थान पुलिस में कार्यरत ने अपने परिजन का मृत्यु भोज का बहिष्कार पूर्णता किया गया है । वहीं पंच पटेलों ने पगड़ी का दस्तूर को रीति रिवाज के अनुसार संपन्न करवाया गया है ।