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बूंदी : पर्यावरण संरक्षण की आदतों को जीवन में आत्मसात करें युवा - तिवारी 

बूंदी : पर्यावरण संरक्षण की आदतों को जीवन में आत्मसात करें युवा - तिवारी 

  • रंगों से मनोभावों को कागज पर उकेरा, निबंध में लिखा वृक्षारोपण का महत्व

बूंदी। मेरा युवा भारत केंद्र, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वाधान में 'एक पेड़ माँ के नाम'- वृक्षारोपण महाभियान का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के तहत संगोष्ठी व ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताएं आयोजित की गई, जिसमें युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्व मनोभावों को कागज़ पर परिलक्षित किया, साथ ही संवाद कर वृक्षारोपण के महत्व की नवयुवाओं को जानकारी दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि असिस्टेंट प्रोफेसर व युवा विकास कार्यक्रम से जुड़े डॉ. सर्वेश तिवारी रहे। अध्यक्षता प्रकृति प्रेमी व युवा प्रेरक गोविंद प्रजापत ने की। विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद् गुरमीत सिंह, रामेष्ट युवा मंडल अध्यक्ष शिखर पंचोली रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि असिस्टेंट प्रोफेसर तिवारी ने वृक्षारोपण का महत्व बताते हुए कहा कि पेड़-पौधे पर्यावरण को संतुलित रखने, जलवायु परिवर्तन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की आदतों को जीवन में आत्मसात करने की अपील की। अध्यक्षता कर रहे प्रजापत ने पर्यावरण-प्रदूषण से होने वाले हानियों पर चिंता जताते हुए भविष्य में दृष्टिगत दुष्प्रभावों के संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी। विशिष्ट अतिथि रामेष्ट युवा मंडल अध्यक्ष पंचोली ने युवाओं को अधिक वृक्षारोपण करने एवं पेड़-पौधों की सार-संभाल का संकल्प दिलाया। संचालन युवा प्रतिनिधि रोहन गुर्जर ने किया। केन्द्र के बालू लाल वैष्णव, जयसिंह, हिम्मत कुमार आदि मौजूद रहे।कार्यक्रम से पूर्व अतिथियों व युवाओं ने पौधारोपण किया व फलदार पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

मेरा युवा भारत केन्द्र द्वारा ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताएं आयोजित, विजेता हुए पुरस्कृत- केन्द्र से जुड़े भूपेन्द्र योगी ने बताया कि आयोजन के तहत ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताएं निबंध-चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें युवाओं ने उत्साह से भाग लेकर स्व मनोभावों को कागज पर उकेरा। निबंध प्रतियोगिता में वंश प्रताप सिंह प्रथम, अनुराग मीणा द्वितीय, अक्षय मीणा तृतीय स्थान पर रहे। चित्रकला प्रतियोगिता में टीना पंकज प्रथम, लक्षित जैन द्वितीय, प्रहलाद प्रजापत तृतीय रहे। विजेता प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह देकर पुरस्कृत किया गया।

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