राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का शिविर मंगलवार को
धौलपुर। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयेाग (एनसीपीसीआर) भारत सरकार द्वारा सीपीसीआर अधिनियम 2007 के अंतर्गत गठित एक संवैधानिक निकाय है। आयोग का मुख्य अधिदेश सभी बच्चों को संविधान के विभिन्न अधिनियमों/कानूनों के प्रावधानों के अंतर्गत निहित अधिकारों का लाभ लेने हेतु सक्षम बनाना है। आयोग का दल बसेडी ब्लॉक जिला धौलपुर का दौरा करके शिकायत निवारण शिविर/पीठ आयोजित कर रहा है और बाल अधिकार के उल्लंघन के विरूद्ध आपकी शिकायत प्राप्त कर रहा है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के शिविर/पीठ के समक्ष कोई व्यक्ति जिसमें बच्चे, माता-पिता, संरक्षक, देखभालकर्त्ता, या बाल अधिकारों के लिए काम करने वाला कोई अन्य शामिल है अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकता है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के शिविर/पीठ का आयोजन 22 अगस्त से ब्लॉक बसेडी में होगा जिसका पंजीकरण शुरू होने का समय प्रातः 9 बजे से प्रारम्भ होगा एवं शिविर/पीठ का समय 10 बजे से होगा ।
सभी वर्ग के बच्चे जिसमें सडकों पर रहने वाले बच्चे, स्कूलों, बाल देखभाल संस्थानांे, बाल गृहों, हॉस्टल, या अन्य कोई स्थान जहां बच्चे शिक्षा/प्रशिक्षण आदि शामिल हैं, शिविर/पीठ के समक्ष अपनी शिकायत/प्रस्तुती दे सकते हैं। जिसमे घरेलू श्रम के तौर पर परिसंकटमय व्यवसाय में बाल श्रमिकों को लगाना, देय/प्रतिपूर्ति का गैर-भुगतान, बाल रम से बचाए गए बच्चों की वापसी, सड़कों पर उत्पाद बेचते बच्चे, एसिड हमले से संबंधित मामले, माता-पिता/संरक्षकों/अन्य किसी व्यक्ति के साथ सडकों पर भीख मांगना, जबरदस्ती भीख मंगवाना। शारीरिक दुर्व्यवहार/शोषण /परित्याग/उपेक्षा करना, घरेलू हिंसा के शिकार बच्चे, एचआईवी स्थिति के आधार पर बच्चों से भेदभाव करना, पुलिस द्वारा बच्चों को पीटा जाना, सीसीआई में बच्चें से दुर्व्यवहार, बच्चों के खिलाफ हिंसा, बच्चे को बेचना, उपेक्षा के कारण हत्या, लापता बच्चा, आत्महत्या, इलैक्ट्रोनिक/सोशल/प्रिंट मीडिया से बाल अधिकारों का उल्लंघन, आस-पास के विद्यालय, अवसंरचना का प्रभाव, केपिटेशन शुल्क संबंधी, स्कूल में शारीरिक दंड/दुर्व्यवहार, स्कूल में प्रवेश से इंकार, दिव्यांग संबंधी शिकायत, भेदभाव, गैर-एनसीईआरटी/गैर-एससीईआरटी किताबें, शैक्षणिक प्राधिकरण द्वारा कोई पाठ्यक्रम/मूल्यांकन प्रक्रिया निर्धारित नहीं की गई है, स्कूल परिसर का दुरूपयोग, स्कूल भवन के बंद होने/अधिग्रहण के मामले में कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होना, यौन दुर्व्यवहार, प्रतिपूर्ति, चिकित्सकीय उपेक्षा, उपचार में विलंब, निष्क्रियता संबंधी, रोग संबंधी, कुपोषण, मध्याह्न भोजन, मादक पदार्थ/द्रव्य का सेवन, सभी बाल विकास विकारों के लिए पुनर्वास आदि शामिल है।