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भारत में बढ़ रहे है कैंसर के मामले

भारत में बढ़ रहे है कैंसर के मामले

विश्व कैंसर दिवस हर साल 4 फरवरी को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य
कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी को लेकर लोगों में जागरुकता फैलाना है। भारत में
कैंसर का खतरा पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ते देखा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन
के नवीनतम अनुमानों के अनुसार 2022 में दुनियाभर में कैंसर के दो करोड़ नए मामलों एवं 97
लाख मौतों के साथ भारत में कैंसर के 14.1 लाख से अधिक नए मामले सामने आए और इस
रोग के कारण 9.1 लाख से अधिक मौतें हुई। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर एजेंसी
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत में साल-दर
साल इस रोग का खतरा काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों में होंठ,
ओरल कैविटी और फेफड़ों के कैंसर के मामले सबसे अधिक देखे जा रहे हैं, वहीं महिलाओं में
स्तन और सर्वाइकल कैंसर के केस सबसे आम देखे गए हैं। नए कैंसर के मामलों में 27 फीसदी
केस स्तन कैंसर जबकि 18 प्रतिशत मामले सर्वाइकल कैंसर के देखे गए हैं।
कैंसर का अर्थ होता है शरीर में कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि होना। आजकल नाना प्रकार की
बीमारियों से बच्चे से बुजुर्ग तक पीड़ित है। भागदौड़ भरी ज़िंदगी में आज हर व्यक्ति अच्छी
सेहत की बात करता है मगर अधिकांश व्यक्तियों को रोग का या तो समय पर पता नहीं चल
पाता है या उसका सही तरह से उपचार नहीं हो पाता है, जिसके कारण हर साल पूरी दुनिया में
करोड़ों लोगों की असमय ही अकाल मृत्यु हो जाती है। ऐसी ही एक बीमारी कैंसर है। देश में
कैंसर रोगियों की संख्या में लगातार वृद्धि बेहद चिंताजनक है।
कैंसर रोग के सबसे बड़े कारणों में धूम्रपान, तंबाकू और शराब का सेवन, मोटापा, शरीर में
पोषक तत्वों और शारीरिक गतिविधियों में कमी को जिम्मेदार माना जाता है। कैंसर एक नहीं
अपितु कई तरह के होते हैं। इनमें मुख कैंसर, स्तन कैंसर, पेट का कैंसर, ब्लड कैंसर, गले का कैंसर,
गर्भाशय का कैंसर, अंडाशय का कैंसर, प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर, मस्तिष्क का कैंसर, लिवर (यकृत)
कैंसर, बोन कैंसर और फेफड़ों का कैंसर शामिल है।
गुटखा, खैनी, तंबाकू सिगरेट, शराब, और पान मसाला मुख रोगों के लिए बेहद घातक और खतरनाक
साबित हो रहे है। इनके सेवन से मुंह में जलन, छाले, मुंह के कम खुलने की समस्या आम है। मुंह के छाले
यानी माउथ अल्सर यूं तो एक बहुत ही सामान्य परेशानी है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना जानलेवा भी

साबित हो सकता है, क्योंकि यह किसी गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है। भारत में बच्चे से बुजुर्ग
तक को सरे आम इनका सेवन करते देखा जा सकता है। यह शोक अमीर से गरीब तक सभी आयु वर्ग के
लोगों में है। हमारे देश में लाखों लोग आज मुख की विभिन्न बीमारियों से ग्रसित है। यह बीमारी धीरे धीरे
कैंसर का रूप ले रही है जिनका इलाज असाध्य हो चला है। आईसीएमआर की रिपोर्ट को देखें तो मुख के
कैंसर से मरने वालों की तादाद में हर साल वृद्धि हो रही है जो हमारे लिए बेहद चिंतनीय है। यह स्थिति तो
तब है जब अनेक राज्य सरकारों ने अपने यहाँ गुटखा और पान मसाला पर रोक लगा रखी है।
मुँह के कैंसर का अर्थ है मौखिक गुहा (होठों से शुरू होकर पीछे टॉन्सिल तक का हिस्सा) अथवा
ओरोफैरिन्कस (गले का अंदरूनी हिस्सा) के ऊतकों में होने वाला कैंसर। जब शरीर के ओरल कैविटी के
किसी भी भाग में कैंसर होता है तो इसे ओरल कैंसर कहा जाता है। ओरल कैविटी में होंठ, गाल, लार ग्रंथिया,
कोमल व हार्ड तालू, यूवुला, मसूडों, टॉन्सिल, जीभ और जीभ के अंदर का हिस्सा आते हैं। इस कैंसर के होने
का कारण ओरल कैविटी के भागों में कोशिकाओं की अनियमित वृद्धि होती है। ओरल कैंसर होने का
जोखिम उम्र के साथ बढ़ता है। ओरल कैंसर आज हमारे देश की एक प्रमुख समस्या के रुप में बीमारी उभरी
है सबसे ज्यादा पुरुषों में पाया जाता है इसका मुख्य कारण पान मसाला, तंबाकू बीड़ी सिगरेट का प्रयोग
करना है।

-  बाल मुकुन्द ओझा

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