भारत में बढ़ता कैंसर का प्रकोप
स्वस्थ जीवन का अधिकार हर मनुष्य को है। कैंसर का अर्थ होता है शरीर में कोशिकाओं की अनियंत्रित
वृद्धि होना। आजकल नाना प्रकार की बीमारियों से बच्चे से बुजुर्ग तक पीड़ित है। भागदौड़ भरी ज़िंदगी में
आज हर व्यक्ति अच्छी सेहत की बात करता है मगर अधिकांश व्यक्तियों को रोग का या तो समय पर पता
नहीं चल पाता है या उसका सही तरह से उपचार नहीं हो पाता है, जिसके कारण हर साल पूरी दुनिया में
करोड़ों लोगों की असमय ही अकाल मृत्यु हो जाती है। ऐसी ही एक बीमारी कैंसर है। देश में कैंसर रोगियों
की संख्या में लगातार वृद्धि बेहद चिंताजनक है। पिछले पांच सालों के आंकड़ों पर नज़र डालेंगे
तो पाएंगे कैंसर ने लगातार देश में अपना दायरा बढ़ाया है। इस अवधि में कैंसर रोगियों की
संख्या कम होने के बजाय बढ़ती ही गयी है। राज्य सभा में बताया गया है कि कैंसर पीड़ितों की
संख्या में अगले दो साल तक लगभग एक लाख की वृद्धि होने का अनुमान है। स्वास्थ्य व
परिवार कल्याण राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने मंगलवार को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर
में बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के
आंकड़ों के अनुसार कैंसर रोगियों की संख्या वर्ष 2022 में 14.61 लाख से बढ़कर साल 2025
तक 15.7 लाख करोड़ होने का अनुमान है। विगत पांच वर्षों से कैंसर रोगियों की संख्या में
लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। 2018 में कैंसर रोगियों की संख्या 13 लाख 25 हजार
232 थी जो 2022 में बढ़कर 14 लाख 61 हजार 427 हो गई। आंकड़ों के अनुसार देश में पुरुषों में
सबसे ज्यादा मुंह और फेफड़ों के कैंसर के मामले सामने आए. वहीं महिलाओं में सबसे ज्यादा मामले ब्रेस्ट
और गर्भाशय के कैंसर के रहे है।
कैंसर रोग के सबसे बड़े कारणों में धूम्रपान, तंबाकू और शराब का सेवन, मोटापा, शरीर में
पोषक तत्वों और शारीरिक गतिविधियों में कमी को जिम्मेदार माना जाता है। कैंसर एक नहीं
अपितु कई तरह के होते हैं। इनमें मुख कैंसर, स्तन कैंसर, पेट का कैंसर, ब्लड कैंसर, गले का कैंसर,
गर्भाशय का कैंसर, अंडाशय का कैंसर, प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर, मस्तिष्क का कैंसर, लिवर (यकृत)
कैंसर, बोन कैंसर और फेफड़ों का कैंसर शामिल है। यहाँ हम मुख कैंसर की बात विशेष रूप से कर रहे है।
हमारे देश को मुंह के कैंसर की वैश्विक राजधानी माना जाता है। मानव शरीर में जितने भी प्रकार के कैंसर
पनपते हैं, उनमें से 30 प्रतिशत से भी अधिक मुंह के कैंसर होते हैं।
गुटखा, खैनी, तंबाकू सिगरेट, शराब, और पान मसाला मुख रोगों के लिए बेहद घातक और खतरनाक
साबित हो रहे है। इनके सेवन से मुंह में जलन, छाले, मुंह के कम खुलने की समस्या आम है। मुंह के छाले
यानी माउथ अल्सर यूं तो एक बहुत ही सामान्य परेशानी है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना जानलेवा भी
साबित हो सकता है, क्योंकि यह किसी गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है। भारत में बच्चे से बुजुर्ग
तक को सरे आम इनका सेवन करते देखा जा सकता है। यह शोक अमीर से गरीब तक सभी आयु वर्ग के
लोगों में है। हमारे देश में लाखों लोग आज मुख की विभिन्न बीमारियों से ग्रसित है। यह बीमारी धीरे धीरे
कैंसर का रूप ले रही है जिनका इलाज असाध्य हो चला है। आईसीएमआर की रिपोर्ट को देखें तो मुख के
कैंसर से मरने वालों की तादाद में हर साल वृद्धि हो रही है जो हमारे लिए बेहद चिंतनीय है। यह स्थिति तो
तब है जब अनेक राज्य सरकारों ने अपने यहाँ गुटखा और पान मसाला पर रोक लगा रखी है।
मुँह के कैंसर का अर्थ है मौखिक गुहा (होठों से शुरू होकर पीछे टॉन्सिल तक का हिस्सा) अथवा
ओरोफैरिन्कस (गले का अंदरूनी हिस्सा) के ऊतकों में होने वाला कैंसर। जब शरीर के ओरल कैविटी के
किसी भी भाग में कैंसर होता है तो इसे ओरल कैंसर कहा जाता है। ओरल कैविटी में होंठ, गाल, लार ग्रंथिया,
कोमल व हार्ड तालू, यूवुला, मसूडों, टॉन्सिल, जीभ और जीभ के अंदर का हिस्सा आते हैं। इस कैंसर के होने
का कारण ओरल कैविटी के भागों में कोशिकाओं की अनियमित वृद्धि होती है। ओरल कैंसर होने का
जोखिम उम्र के साथ बढ़ता है। ओरल कैंसर आज हमारे देश की एक प्रमुख समस्या के रुप में बीमारी उभरी
है सबसे ज्यादा पुरुषों में पाया जाता है इसका मुख्य कारण पान मसाला, तंबाकू बीड़ी सिगरेट का प्रयोग
करना है।