राजस्व रिकॉर्ड के अतिरिक्त अन्य दस्तावेजों के आधार पर भी जारी हो सकता है जाति प्रमाण पत्र – सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री
जयपुर। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री अविनाश गहलोत ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार द्वारा 9 सितम्बर, 2015 को जारी दिशा-निर्देशानुसार राजस्व रिकॉर्ड के अतिरिक्त अन्य दस्तावेज जैसे शैक्षणिक रिकॉर्ड, नगर पालिका एवं ग्राम पंचायत रिकॉर्ड, जिनमें आवेदनकर्ता की पैतृक जाति की पुष्टि होती है, आदि का परीक्षण कर भी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक श्री सुखवंत सिंह द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय, केंद्र सरकार द्वारा 22 मार्च 1977 को जारी स्पष्टीकरण के अनुसार जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए राजस्व रिकॉर्ड को ही प्राथमिक दस्तावेज माना गया है। इससे पहले सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने बताया कि राजस्थान राज्य पिछडा वर्ग आयोग की रिपोर्ट अनुशंषा के आधार पर राज्य सरकार की 06 अगस्त, 1994 को जारी अधिसूचना के क्रमांक 54159 द्वारा ओढ़ जाति को राज्य अन्य पिछडा वर्ग की सूची में क्रम संख्या 42 पर तथा 12 नवंबर, 1999 को जारी अधिसूचना क्रमांक 75681 द्वारा रायसिक्ख जाति को राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में क्रम संख्या 55 पर सम्मिलित किया गया है। इनका विवरण उन्होंने सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि हरियाणा राज्य से संबंधित सूचना विभाग में उपलब्ध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने का कार्य केंद्र सरकार द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत एक निर्धारित प्रक्रियानुसार किया जाता है।