जनगणना-2027: लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने किया स्व-गणना पंजीकरण
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को जनगणना-2027 के तहत स्व-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) अभियान में भाग लेते हुए अपने परिवार का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी साझा करते हुए नागरिकों से भी इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। बिरला ने पोस्ट में कहा कि जनगणना-2027 के पहले चरण की शुरुआत हो चुकी है और उन्होंने दिल्ली स्थित अपने आवास पर स्व-गणना प्रक्रिया पूरी की। उन्होंने इसे “नए युग की शुरुआत” बताते हुए कहा कि पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित हो रही है, जिससे नागरिकों को स्वयं अपने परिवार का विवरण दर्ज करने की सुविधा मिली है। उन्होंने इस प्रक्रिया को सुरक्षित, सटीक और सुविधाजनक बताया। उल्लेखनीय है कि देश में जनगणना-2027 की औपचारिक शुरुआत एक अप्रैल 2026 को हुई। इस अभियान का शुभारंभ सबसे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्व-गणना कर किया। इसके बाद उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृहमंत्री अमित शाह ने भी ऑनलाइन माध्यम से अपनी-अपनी स्व-गणना पूरी की। केंद्र सरकार ने इस बार जनगणना को पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में संचालित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत नागरिक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपना डेटा दर्ज कर सकते हैं। स्व-गणना के लिए अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में समयावधि निर्धारित की गई है। गृह मंत्रालय के अनुसार जनगणना-2027 का पहला चरण ‘मकानसूचीकरण और मकानों की गणना’ एक अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान घरों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं, परिसंपत्तियों और बुनियादी ढांचे से संबंधित 33 प्रश्नों के माध्यम से विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। प्रारंभिक चरण में स्व-गणना सुविधा आठ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शुरू की गई है, जिनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और दिल्ली के नई दिल्ली नगरपालिका परिषद तथा दिल्ली छावनी बोर्ड क्षेत्र शामिल हैं। सरकार के अनुसार यह वेब-आधारित प्रणाली 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है और इसमें उच्चस्तरीय सुरक्षा उपाय जैसे एन्क्रिप्शन और बहुस्तरीय प्रमाणीकरण शामिल हैं। स्व-गणना पूरी करने के बाद नागरिकों को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाती है, जिसका उपयोग सत्यापन के दौरान किया जाएगा। हालांकि डिजिटल सुविधा उपलब्ध है, फिर भी पारंपरिक प्रक्रिया जारी रहेगी, जिसके तहत सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। साथ ही, घर-घर सर्वेक्षण से पहले 15 दिनों की अतिरिक्त अवधि स्व-गणना के लिए दी गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग स्वयं अपना डेटा दर्ज कर सकें।