पेपर लीक को लेकर देशभर में घमासान
देशभर में परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पेपर लीक किसी
राज्य विशेष का मामला नहीं है अपितु यह देश की युवा आबादी के भविष्य से जुड़ा ज्वलंत
विषय है। आज प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में शुचिता बनाये रखना किसी कठिनतम चुनौती
से कम नहीं है । सरकारी नौकरी पाने का सपना हर शिक्षित युवा देखता है। इसके लिए वह
सालों तक कड़ी मेहनत और रात दिन पढ़ाई करके परीक्षा में इस उम्मीद और विश्वास से बैठता
है कि उसे सफल होना है, लेकिन पेपर लीक की घटनाएं ऐसे अभ्यर्थियों का सपना और हौसला
तोड़ देती हैं। पेपर लीक के कारण आयोग्य उम्मीदवार बाजी मार कर शासनतंत्र का हिस्सा बन
जाता है। भर्ती परीक्षाओं में सरकारी लापरवाही का खामियाजा बेरोजगारों को वर्षों से भुगतना पड़
रहा है। भर्ती परीक्षाओं को फिर से आयोजित ना केवल बेरोजगार अभ्यर्थियों को मानसिक और
आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है, बल्कि परीक्षा का आयोजन करने वाली संस्था को भी भारी
नुकसान होता है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 5 सालों में देश के 15 राज्यों में पेपर लीक के मामले
समाने आए हैं जिनमें 40 से अधिक नौकरी भर्ती परीक्षाओं में परीक्षा से पहले पेपर लीक हो
गया था। अच्छे भविष्य के लिए लाखों युवाओं के लिए सरकारी नौकरियां किसी सपने से कम
नहीं होती। सालों की मेहनत करने के बाद मिलने वाला एक मौका उनकी जिंदगी बदल सकता
है। लेकिन क्या हो जब उनकी मेहनत पर पेपर लीक का दाग लग जाए? पेपर लीक की इस
महामारी में सरकारी कर्मचारी शिक्षक अपराधी माफिया, कोचिंग सेंटर, आदि शामिल हैं।
विभिन्न प्रदेशों में दर्जनों संगठित गिरोह सक्रीय है जिन्होंने पेपर लीक का ठेका ले रखा है।
इन गैंगों ने मोटी राशि वसूलकर पेपर बेचने का आपराधिक कार्य किया। अनेक सरगना और
और परीक्षार्थी पुलिस की पकड़ में है जिनसे गहरी पूछताछ की जा रही है।
पेपर लीक की समस्या से जूझ रहे कई राज्यों में से राजस्थान भी एक है। राजस्थान में
विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक होने का सिलसिला कई सालों से चल रहा है। पिछले
कांग्रेस शासनकाल में यह कार्य धड़ल्ले से चला। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों
के लगातार सामने आने से राजस्थान की पूर्ववर्ती गहलोत सरकार चौतरफा घिर गई थी ।भाजपा
नेताओं का कहना है गहलोत का 5 वर्ष का शासनकाल भर्तियों के दलालों का स्वर्णकाल और
युवाओं के लिए अभिशाप बन चुका है। पेपर लीक प्रदेश के युवाओं के लिए अभिशाप बन गया
है। इससे न सिर्फ भविष्य निर्माण के कीमती वर्ष बर्बाद हो रहे हैं बल्कि उनके परिवारों पर भी
आर्थिक और मानसिक बोझ पड़ रहा है। प्रदेश में पेपर लीक होने की घटनाएं बढ़ती जा रही है।
जिस वजह से एग्जाम को रद्द करना पड़ता है और ऐसे छात्रों के भविष्य पर भी असर पड़ता
है। कांग्रेस शासन में बार बार प्रतियोगिता परीक्षाओं के पेपर लीक होने और अन्य गड़बड़ियों को
रोकने के लिए राज्य की भजनलाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। वर्ष 2021 में हुई राजस्थान
पुलिस की उप-निरीक्षक भर्ती परीक्षा में भी भर्ती माफिया द्वारा पेपर लीक करवाकर कुछ अभ्यर्थियों को
उपलब्ध करवाकर उन्हें परीक्षा पास करवाना सामने आया। इस प्रकरण में किसी परिवादी के सामने आए बिना,
एसआईटी ने स्वयं प्रकरण दर्ज किया और 20 अपरधियों को नामजद किया। एसओजी ने बड़ी कार्यवाही करते हुए
श्री वी. के. सिंह, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस के नेतृत्व में 15 प्रशिक्षु पुलिस उप निरीक्षक, जो राजस्थान पुलिस
अकादमी एवं आरपीटीसी किशनगढ़ में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे, को इस प्रकरण में हिरासत में लिया है। इनमें इस
परीक्षा का टॉप्पर भी शामिल है। राजस्थान की सब इंस्पेक्टर भर्ती 2021 मामले में एसओजी चौंकाने वाले खुलासे
कर रही है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के शासन में हुई इस भर्ती में पेपर लीक के गंभीर आरोप लगे लेकिन तत्कालीन
सरकार ने पेपर लीक नहीं माना और भर्ती को पूरा किया। अब प्रदेश में सरकार बदली तो एसओजी एक के बाद एक
खुलासे कर रही है। एसओजी ने सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े को उजागर किया है। सब इंस्पेक्टर भर्ती
के टॉपर रहे नरेश खिलेरी सहित 15 ट्रेनी एसआई को एसओजी ने पकड़ा है। आरोप है कि इन चयनित अभ्यर्थियों ने
पेपर लीक की वजह से लिखित परीक्षा को अच्छे नंबर से पास किया। चयनित थानेदारों में कई तो ऐसे हैं जिन्हें
सामान्य सवालों के जवाब भी नहीं पता।
- बाल मुकुन्द ओझा