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यातायात मार्गों पर अराजकता की स्थिति

यातायात मार्गों पर अराजकता की स्थिति

देश में 15 जनवरी से 14 फरवरी तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह आयोजित किया रहा है। सरकार ने सड़क
हादसों में 50 प्रतिशत मौतों में कमी का लक्ष्य निर्धारित किया था मगर इसके उलट मौतों का आंकड़ा बढ़ता
ही रहा है। भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में हर साल लाखों की संख्या में लोग अपनी जान
गवां देते हैं। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारत में दुनिया के केवल एक फीसदी वाहन हैं
इसके बावजूद पूरे विश्व में होने वाले हादसों का 11 फीसदी देश में ही घटित होते हैं।
राजस्थान की बात करें तो यहां सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए परिवहन विभाग ने अपना नाम
परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग जरूर रख लिया है मगर प्रदेश में आये दिन सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ
लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पिछले दस सालों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो सड़क हादसे कम होने के बजाय
बढ़ते ही जा रहे हैं। राजस्थान में गत वर्ष लगभग 25 हजार सड़क हादसों में लगभग 12 हजार लोगों की मौत
हुई जिनमें युवा सर्वाधिक अकाल मृत्यु के शिकार हुए है। घायलों की तादाद भी हजारों में है। राजस्थान की
राजधानी जयपुर में इन दिनों सड़क हादसों के बादल मंडरा रहे है। प्रदेश की राजधानी हादसों का मुख्य केंद्र
बनी हुई है। सड़क हादसों में जयपुर, और दौसा अग्रणी है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक प्रतिदिन इसकी चपेट में
आ रहे है। यातायात मार्गों पर अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो रही है। दो पहिया हो या चार पहिया किसी
को भी जिंदगी की परवाह नहीं है। एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी है। यातायात नियमों की सरेआम
धज्जियाँ उड़ रही है। नियमों की पालना नहीं होने से दुर्घटनाओं के अम्बार लग रहे है।
प्रदेश में सड़कों की बदहाल स्थिति में अतिक्रमण, अवैध कब्जों और यातायात की बिगड़ी व्यवस्था ने कोढ़
में खाज का काम किया है। विशेषकर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सड़कें अतिक्रमण के कारण सिकुड़ कर रह गई
हैं। राजधानी जयपुर सहित इस समय प्रदेश के सभी मेट्रो सिटी यातायात की सुचारू व्यवस्था नहीं होने से
आम आदमी परेशानी को झेल रहा है। राजधानी में परकोटे की स्थिति सबसे खराब है। परकोटे के मुख्य
बाजारों किशनपोल, त्रिपोलिया, जौहरी बाजार, रामगंज बाजार, छोटी-बड़ी चौपड़ की स्थिति किसी से छिपी
नहीं है। वाहनों के बढ़ जाने के कारण और सड़कों पर अतिक्रमण के फलस्वरूप यहाँ ट्रैफिक की व्यवस्था बुरी
तरह बिगड़ गई है। अतिक्रमण और अवैध कब्जों ने इन बाजारों की शांति का जैसे किसी ने हरण कर लिया
है। ऑपरेशन पिंक के दौरान अवैध कब्जे और अतिक्रमण को हटाकर आम नागरिक को राहत दी गई थी

मगर अब फिर से अतिक्रमण की पुरानी स्थिति बहाल होने से आम आदमी आहत है। एक बार फिर
राजधानी अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है। लोग चार पहिया वाहन लेकर जाने में डरने लगे हैं।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अवसर पर सड़क
दुर्घटनाओं में कमी लाने लिए आमजन के नाम अपील जारी करते हुए सबका साथ, सबका
प्रयास और सबकी भागीदारी की आवश्यकता प्रतिपादित की है। यह अपील केवल मीडिया तक
सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए जन जाग्रति उत्पन्न करने के प्रयास धरातल पर उतारने
की जरुरत है। सड़क सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है, आम जनता में खासतौर से नये आयु वर्ग के लोगों में
अधिक जागरुकता लाने के लिये इसे शिक्षा, सामाजिक जागरुकता आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जोड़ा गया
है। सड़क दुर्घटना, चोट और मृत्यु आज के दिनों में बहुत आम हो चला है। सड़क पर ऐसी दुर्घटनाओं की
मुख्य वजह लोगों द्वारा सड़क यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा उपायों की अनदेखी है। गलत दिशा में
गाड़ी चलाना, सड़क सुरक्षा नियमों और उपायों में कमी, तेज गति, नशे में गाड़ी चलाने आदि । सड़क हादसों
की संख्या को घटाने के लिये उनकी सुरक्षा के लिये सभी सड़क का इस्तेमाल करने वालों के लिये सरकार ने
विभिन्न प्रकार के सड़क यातायात और सड़क सुरक्षा नियम बनाये हैं। हमें उन सभी नियमों और नियंत्रकों
का पालन करना चाहिये जैसे रक्षात्मक चालन की क्रिया, सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल, गति सीमा को ठीक
बनायें रखना, सड़क पर बने निशानों को समझना आदि। जान लेवा सड़क हादसों को रोकने के लिए जरूरी है
कि सड़कों की स्थिति अच्छी हो, जन कल्याणकारी सरकार का यह दायित्व है कि वह उच्च गुणवत्ता युक्त
सड़कों का निर्माण करें और क्षत-विक्षत सड़कों को दुरस्त करें ताकि वाहन किसी दुर्घटना का शिकार नहीं
होवे। नगर निकायों और एजेन्सियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिये। घटिया निर्माण पर तुरन्त कार्यवाही
हो तथा यातायात और ट्रैफिक की वर्तमान स्थिति में जनभावनाओं के अनुरूप सुधार हो। आम आदमी को
राहत प्रदान करने के लिए निर्माण कार्यों में पारदर्शिता का होना अत्यावश्यक है।

 - बाल मुकुन्द ओझा 

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