बचपन की निष्क्रियता से दिल के दौरे का खतरा
निष्क्रियता जीवन में अनेक खतरों को जन्म देती है विशेषकर विद्यार्थी जगत इससे काफी
प्रभावित हुआ है। ईसीसी कांग्रेस 23 में प्रस्तुत एक अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक बचपन की
निष्क्रियता बाद में दिल के दौरे जैसी बीमारियों का शिकार हो जाने का खतरा बढ़ जाता है।
स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से युवाओं का दिल इसलिए भी भारी हो जाता है क्योंकि उन्होंने
बचपन में भागने दौड़ने जैसी शारीरिक गतिविधियों में कम समय दिया। शरीर को स्वस्थ और
फिट रखने की कोशिशें एक बार फिर परवान पर है। विभिन्न शोध रिपोर्टों में साफतौर पर इंगित
किया गया है कि आजकल की भागदौड़भरी और व्यस्त लाइफस्टाइल ने बच्चे से बुजुर्ग तक को
समय से पूर्व ही शारीरिक रूप से अपंग करके रख दिया है। यदि हम चेतावनियों के बावजूद नहीं
सुधरे तो स्वस्थ जीवन जीना भूलना होगा।
देश में 54 प्रतिशत लोगों की शारीरिक गतिविधियां करने में कोई रुचि नहीं है और 10 फीसदी से कम लोग
मनोरंजन के तौर पर शारीरिक गतिविधियां करते हैं। आईसीएमआर डेटा में इस बात का खुलासा हुआ है।
आजकल आर्थराइटिस जैसी जोड़ों की बीमारियां उम्र तक सीमित नहीं रह गई हैं बल्कि शारीरिक रूप से
काम न करना भी इस बीमारी के बोझ को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इंडियन काउंसिल ऑफ
मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के आंकड़ों बताते हैं कि 54.4 फीसदी लोगों की शारीरिक गतिविधियां करने
में रुचि नहीं है। इस सरकारी एजेंसी द्वारा की गई स्टडी के अनुसार लोग यात्रा और मनोरंजन से जुड़ी
शारीरिक गतिविधियों के मुकाबले काम में ज्यादा समय बिताते हैं। आलसी जीवनशैली, कसरत न करना
या प्रोफेशनल की देखरेख के बिना कसरत करने से युवाओं के जोड़ों के लिगामेंट में दिक्कतें होने लगती हैं।
व्यस्त जीवन शैली के कारण आजकल कमर दर्द एक मुख्य समस्या बनती जा रही है। ज्यादातर मामलों में
कमर के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत बहुत ज्यादा बढ़ती जा रही है। इस बारे में कई तरह के शोध किए
जा चुके हैं। कई अनुसंधान के बाद यही नतीजे मिलते हैं कसरत या अन्य कोई भी शारीरिक गतिविधि
लगातार करते रहने से कमर के निचले हिस्से में होने वाले दर्द (लोअर बैक पैन) को 16 प्रतिशत तक कम
किया जा सकता है। यह शोध ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने
बताया हैं कि टहलना, कठिन व्यायाम, तथा अन्य शारीरिक गतिविधियों से कमर दर्द को कम किया जा
सकता है। शोधकर्ताओं ने 160,000 से अधिक लोगों पर 36 तरह के अलग-अलग अध्ययन किए तथा प्राप्त
आंकड़ों का विश्लेषण किया। विश्लेषण से यह नतीजा सामने आया है कि निरंतर व्यायाम करने से कमर के
निचले हिस्से में होने वाले असहनीय दर्द को कम किया जा सकता है। इसके अलावा भी अन्य तरह की
शारीरिक गतिविधियां दर्द से राहत दिलाती हैं। वर्तमान दौर में दिन भर एक ही जगह बैठे रहने से इस तरह
की बीमारियों का जन्म हुआ हैं।
जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है तो हमारे शरीर के काम करने की क्षमता धीमी हो जाती है। हमारे शरीर की
हड्डियां के दोबारा बनने और रिपेयर होने की क्षमता कम होने लगती है। हमारे घुटनों के जोड़ में मुलायम
टिश्यू मौजूद होते है, जिसे कार्टिलेज कहते है। यह मांसपेशियों को सहारा देते हैं और इससे गतिविधियां
करने में आसानी होती है। यह एक तरह से शॉक आब्जॉर्बर का काम करते हैं। समय के साथ यह मुलायम
टिश्यू घिसने लगते हैं, जिससे जोड़ों में जगह बनने लगती है और इससे जांघ और शिनबोन में घिसाव होने
लगता है।
बदलती जीवनशैली के चलते दफ्तर में घंटों बैठे रहकर काम करने और फिर घर में निष्क्रिय जीवन जीने से
हमारे शरीर में जंग लगने लगा है और हम बीमारियों का आसान शिकार बनते जा रहे हैं। यह स्थिति तब
और भी ज्यादा बिगड़ जाती है जब उम्र 25 पार करती है। 40 की उम्र में आते-आते ज्यादातर लोग आजकल
बेहद अनफिट हो जाते हैं। ऐसे में कोलेस्ट्रॉल लेवल के बढ़ने, ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल के नॉर्मल न रह
पाने, हड्डियों के भुरभुरा होने, मसल्स में तकलीफ होने, तनाव, डिप्रेशन, मोटापा आदि जैसी समस्याएं घर
करने लगती हैं। डिप्रेशन तनाव, चिंता और उदासी का बहुत बड़ा कारण बनता है, जो जल्द ही आपके जीवन
पर असर करना शुरू कर देता है। इससे पहले की यह गंभीर रूप धारण कर लें डिप्रेशन निपटने के उपाय
करने चाहिए। अवसाद से निपटने का सबसे प्रभावी और प्राकृतिक तरीका शारीरिक गतिविधि है।