वन टू वन फार्मूले से मोदी को पटखनी का दावा
लगता है कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत ने विपक्ष को संजीवनी प्रदान करदी है।
कर्नाटक में कांग्रेस की बड़ी जीत से न सिर्फ कांग्रेस, बल्कि विपक्ष की बाकी पार्टियों में भी ये
संदेश गया है कि 2024 में बीजेपी को हराया जा सकता है। इसके साथ ही राहुल गांधी को भी
सियासी प्राण वायु मिल गई है। कांग्रेसी नेताओं ने जोर शोर से राहुल का जयकारा लगाना शुरू
कर दिया है और इस जीत का श्रेय राहुल को देते देर नहीं की। यह भी कहा जा रहा है राहुल
की भारत जोड़ो यात्रा का यह प्रतिफल है की कांग्रेस को भारी जीत हासिल हुई है। बहरहाल
कर्नाटक में भाजपा की हार को विरोधी नेता मोदी की हार करार दे रहे है और अगले साल होने
वाले लोकसभा चुनाव में अपनी जीत की डुग डुगी बजानी शुरू करदी है। बिहार के मुख्यमंत्री
और विपक्ष की धुरी बने नीतीश कुमार ने विपक्ष के लगभग सभी नेताओं से संपर्क साध लिया है
और यह ऐलान भी कर दिया है की भाजपा के सामने वन टू वन मोर्चा लगाया जायेगा। मोदी
का जादू ख़त्म होने का दावा भी किया जाने लगा है। मगर असली परीक्षा इस साल होने वाले
राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में होंगी। इन प्रदेशों में यदि दो प्रदेशों
में भी भाजपा जीत जाती है तो मोदी का करिश्मा कोई भी नहीं तोड़ पायेगा।
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर
रणनीति बनानी शुरू कर दी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा भाजपा के खिलाफ
महागठबंधन बनाने के आह्वान पर कांग्रेस ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए अपनी मुहर लगा दी
है। कांग्रेस पार्टी ने भाजपा को आगामी लोकसभा चुनाव में हराने के लिए महागठबंधन के जरिये
महामुकाबले का शंखनाद फूंक दिया है। नीतीश का कहना है सभी विपक्षी एक जूट हुए तो
भाजपा सौ सीटें भी हासिल नहीं कर पायेगी। कांग्रेस ने राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा को
भुनाने के लिए अपना चुनावी पास फेंक दिया है। मगर यह बताने वाला कोई नहीं है की विपक्षी
दल एक कैसे होंगे। महागठबंधन में नीतीश, लालू, स्टालिन, उद्धव ठाकरे, शरद पवार और
वामपंथी पार्टिया एक झंडे के नीचे आ जाएगी मगर अखिलेश, ममता, मायावती, केजरीवाल
और केसीआर के बिना यह महागठबंधन मोदी का मुकाबला कैसे करेगा। हालाँकि ये सभी नेता
मोदी के खिलाफ हुंकार भर रहे है। मगर सम्पूर्ण एकता के अभाव में मोदी के सफाये की बात
कोरी कल्पना साबित होंगी। इसके अलावा नवीन पटनायक और जगन रेड्डी जैसे नेता भाजपा से
नरम रुख अपनाते हुए अपनी अलग डफली बजायेंगे। नीतीश ने हाल ही नवीन पटनायक से
मुलाकात की थी। बताया जाता है नवीन ने नीतीश को कोई खास तवज्जो नहीं दिया।
वर्ष 2024 में होने वाले लोक सभा चुनाव के मद्ये नज़र देश में एक बार फिर विपक्ष की एकता के लिए
जोरदार प्रयास किये जा रहे है। वर्तमान में विपक्ष कांग्रेस नीत यूपीए के साथ गैर कांग्रेस और गैर भाजपा की
सियासत करने वाले दलों में विभाजित है। विपक्ष पहले से ही कई धड़ों में विभाजित है। गैर भाजपा और गैर
कांग्रेस का नारा बुलंद करने वाले तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्र शेखर राव और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता
बनर्जी के लाख प्रयासों के बाद भी अब तक कोई सशक्त मोर्चा बन नहीं पाया है। ममता बनर्जी और चंद्र
शेखर राव 2024 में नरेंद्र मोदी सरकार को सत्ता बेदखल करने के लिए विपक्षी एकता की कवायद में जुटे हैं।
कांग्रेस और वाम मोर्चे के लिए बंगाल और केरल का चुनावी रण खासा अहमियत रखता है। बंगाल में अपना
वज़ूद खोती जा रही कांग्रेस और वाम मोर्चे को ममता बनर्जी कोई भाव देने को तैयार नहीं है। यहाँ असलो
लड़ाई ममता की पार्टी और भाजपा के बीच है। केरल में भी कांग्रेस और वाम मोर्चा आमने सामने है। वहीँ
आंध्र और तेलंगाना में विपक्ष की एक जुटता की कड़ी परीक्षा है। ममता बनर्जी ने कांग्रेस पर निशाना साधते
हुए एंटी बीजेपी और एंटी कांग्रेस अलायंस बनाने का आह्वान किया है। सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव के
सम्बन्ध भी कांग्रेस से अच्छे नहीं है। राजद के तेजस्वी यादव भाजपा के खिलाफ बनने वाले किसी भी मोर्चे
का आंख मूंद कर साथ देने को तैयार है। उड़ीसा के सीएम पटनायक और आंध्र के सीएम फ़िलहाल किसी
मोर्चे के साथ नहीं है। हालाँकि इन दोनों की भाजपा के साथ नरमी किसी से छिपी नहीं है। दिल्ली के बाद
पंजाब में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी भाजपा के सख्त खिलाफ है मगर कांग्रेस का साथ देने को
तैयार नहीं है। वाम मोर्चे की हालत सांप छुछुंदर जैसी है। अन्य क्षेत्रीय दल भी आपस में बंटे हुए है। विपक्ष
की ऐसी स्थिति भाजपा के लिए सुखद कही जा सकती है। विपक्षी एकता के प्रयास का असली मकसद
2024 में भाजपा को हराना है। बहरहाल विपक्ष की एकता के नगाड़े कुछ नेताओं ने बजाने शुरू कर दिए है।
-बाल मुकुन्द ओझा