SUNDAY STORY : आपस में ही उलझ रही है कांग्रेस प्रदेश के अंदर, अभी भी इतना घमंड
जयपुर । लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के बाद प्रदेश के अंदर सभी 25 की 25 सीटों में मतदान हो चुका है. अब इंतजार 4 जून का है , मगर दिलचस्प बात यह है कि राजस्थान के अंदर कांग्रेस जहां अब विपक्ष बन चुकी है मगर एकता अभी भी नहीं दिख रही है। देखा जा सकता है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने अपने-अपने लोगों को टिकट दिलाई और वहीं पर ही यह लोग एक्टिव रहे. बात करें तो अशोक गहलोत ने अपने पुत्र वैभव गहलोत को जालौर लोकसभा सीट से टिकट दिलवाया और अशोक गहलोत पूरा जालौर सीट को जीतने की जुगत में लग गए यही कारण है कि अशोक गहलोत बाहर दूसरी सीटों पर पूरा दौरा अच्छे तरीके से नहीं कर पाए, फॉर्मेलिटी के लिए ही चले गए हालांकि अशोक गहलोत सभी सीटों पर गए मगर एक-एक बार ही गए वही बात करें तो वैभव गहलोत के लिए अशोक गहलोत ने लगभग डेढ़ महीने के अंदर कम से कम 40 सभाये करी वही प्रवासी राजस्थानियों की नब्ज टटोलने के लिए भी सूरत से लेकर बेंगलुरु ,चेन्नई ,महाराष्ट्र के मुंबई तक के दौरे कर डाले वहीं सचिन पायलट की अगर बात करें तो सचिन पायलट के लगभग 10 लोगों को इस बार टिकट मिला है, उन्होंने एड़ी चोटी का जोर लगाकर दौरे करें और सभाए करी इतना ही नहीं सचिन पायलट ने एक-एक दिन में एक लोकसभा क्षेत्र के अंदर तीन से लेकर चार-चार सभाएं भी करी. वहीं सचिन पायलट ना ही भीलवाड़ा गए और ना ही जालौर गए अजमेर में भी सचिन पायलट का प्रभाव है मगर वह वहां पर भी नहीं गए, ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस की सरकार अब राजस्थान में नहीं है और बात करें तो पिछले दो बार के लोकसभा चुनाव के अंदर कांग्रेस की एक भी सीट राजस्थान में नहीं आई है दिसंबर में हुए चुनाव के बाद कांग्रेस सत्ता से हट गई और पिछले 4 महीने की अगर बात करें तो विपक्ष के रूप में कांग्रेस ने भाजपा की सरकार को एक बार भी घेरने की कोशिश नहीं करी, कुल मिलाकर बात करें तो राजस्थान के अंदर कांग्रेस अभी भी या तो सपने में है कि उनकी यहां पर सरकार है इसलिए बेफिक्र होकर आराम से इच्छा होती है तो प्रचार करने जाते हैं इच्छा नहीं होती है तो नहीं जाते हैं लगभग आधा दर्जन लोकसभा सीट ऐसी है जहां पर इन बड़े नेताओं की आपसी लड़ाई चक्कर में प्रचार से लेकर प्रचार के बीच में और सभाओं को लेकर मिल नहीं मिला और यही कारण है की जीती जिताई सीट कांग्रेस हार सकती है अगर ऐसा होता है तो यह बहुत ही गलत होगा क्योंकि माहौल अभी पूरी 25 सीट जीतने का बीजेपी का नहीं बन रहा है वहीं कांग्रेस इस चीज को समझ नहीं पा रही है और बीजेपी को इसका फायदा मिलेगा।