भाजपा की दिया कुमारी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं कांग्रेस के सीताराम अग्रवाल
जयपुर। भाजपा के लिए सबसे सुरक्षित समझी जाने वाली विद्याधर नगर सीट पर भावी मुख्यमंत्री के रूप में लाई गई जयपुर की राजकुमारी और राजसमंद की वर्तमान सांसद दिया कुमारी के सामने कांग्रेस प्रत्याशी सीताराम अग्रवाल ने कड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर अब तक हुए तीनों चुनावों में भाजपा के नरपतसिंह राजवी ने बड़े अंतर से विजय प्राप्त की थी। इनमें वर्ष 2008 का चुनाव 9040, वर्ष 2013 का चुनाव 37913 और वर्ष 2018 का चुनाव 31232 वोटों से जीता था।
आचार संहिता लगने से पहले 25 सितंबर को जयपुर में हुई पीएम मोदी की रैली में दिया कुमारी को दी गई महत्वपूर्ण भूमिका तथा 9 अक्टूबर को घोषित प्रथम लिस्ट में उनके टिकट की घोषणा से एक बार लगने लगा था कि भाजपा आलाकमान उनको राजस्थान में सीएम चेहरा घोषित करने की तैयारी कर रहा है। किंतु इसी लिस्ट में जब नरपतसिंह राजवी का टिकट काटने की आशंका हुई और दिया कुमारी को महत्व मिलता दिखा तो उसके बाद वसुंधराराजे द्वारा अपनाए गए तेवरों को देखते हुए भाजपा आलाकमान भी दिया कुमारी को लेकर बैक फुट पर नजर आया। जैसे ही नरपत सिंह ने इस क्षेत्र के अपने प्रमुख सिपहसालारों को दिया कुमारी के खिलाफ संकेत देने शुरू किए, भाजपा आलाकमान को दूसरी लिस्ट में नरपतसिंह राजवी सहित अनेक वसुंधरा समर्थकों को टिकट देने पर मजबूर होना पड़ा।
परंतु इस घटनाक्रम ने दिया कुमारी के सीएम चेहरा होने की संभावनाओं पर ग्रहण लगा दिया। रही सही कसर इस विधानसभा क्षेत्र से राजवी के समर्थक कार्यकर्ताओं के चित्तौड़गढ़ कूच ने पूरी कर दी। फिर भी प्रतिद्वंदी कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रत्याशी चयन में हुई देरी ने दिया कुमारी को अपना गढ़ मजबूत करने के लिए पर्याप्त समय दे दिया। लगभग चार सप्ताह बाद जब कांग्रेस पार्टी ने सीताराम अग्रवाल को यहां मैदान में उतारा उस समय तक दिया कुमारी बहुत मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी थी।
सीताराम अग्रवाल यहां पिछला विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही लगातार सक्रिय रहे हैं और पूरे क्षेत्र में उन्होंने सघन संपर्क कायम किया। जबकि दिया कुमारी ने यहां अपनी उम्मीदवारी घोषित होने के बाद कार्यकर्ताओं को टटोलना शुरू किया और उनमें से भी अनेक चित्तौड़गढ़ चले गए। अंतिम स्थिति का आकलन करने पर यह सामने आ रहा है कि इस क्षेत्र में सर्वाधिक मतदाता वाली ब्राह्मण जाति दोनों तरफ बंटी हुई नजर आ रही है।
झोटवाड़ा क्षेत्र में वरिष्ठ पार्षद मंजू शर्मा ने कांग्रेस के पक्ष में ब्राह्मण मतदाताओं पर जोर लगा रखा है तो परंपरागत रूप से भाजपा के समर्थक रहे अनेक ब्राह्मण नेता और कार्यकर्ता भाजपा के साथ भी जुड़े हुए नजर आ रहे हैं। यहां कुल मतदाताओं में दूसरे नंबर पर आने वाले वैश्य वर्ग परंपरागत रूप से भाजपा के साथ रहता आया है किंतु इस बार सीताराम अग्रवाल इनमें बड़ी सेंध लगाते नजर आ रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि सीताराम अग्रवाल की जीत हार भी इसी पर निर्भर करेगी कि वे वैश्य मतदाताओं को कितना अपने पक्ष में खींच पाए हैं राजपूत वर्ग जहां दिया कुमारी के पक्ष में मजबूती से खड़ा है वहीं माली सैनी समाज अशोक गहलोत की सभा के बाद सीताराम अग्रवाल के पक्ष में नजर आ रहा है।
अग्रवाल को इस क्षेत्र के लगभग 20 हजार मुस्लिम तथा विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया में रह रहे लगभग 18 हजार बाहरी मतदाताओं का भी साथ मिलने की उम्मीद है। मुद्दों की बात करें तो सीताराम अग्रवाल को जहां अपनी पांच साल की सेवा तथा काम पर भरोसा है तो दिया कुमारी सनातन और हिंदू मुद्दों के साथ ही नया चेहरा और अपनी सेलिब्रिटी छवि के दम पर मोर्चे पर डटी हुई है।