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मंथन : कॉरपोरेट हॉस्पिटल और बड़े नाम वाले डॉक्टर

मंथन : कॉरपोरेट हॉस्पिटल और बड़े नाम वाले डॉक्टर


यदि आपकी किस्मत अच्छी है तो आपको देवता के रूप में कोई डॉक्टर मिलेगा जो कम से कम दवाई देकर आपको शीघ्र अति शीघ्र आराम दिलवा देगा और आपकी बीमारी को कोई खतरनाक बीमारी का रूप नहीं बताते हुए आप को तसल्ली देगे की आप जल्दी ठीक हो जाएंगे।
वरना आज के दौर में ज्यादातर कारपोरेट हॉस्पिटल और बड़े नाम वाले डॉक्टर इनका लक्ष्य कैसे भी मैरिज से ज्यादा से ज्यादा पैसे वसूलना हो गया है ऐसे अनेकों उदाहरण है जिन्हें किसी सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती फिर भी उनकी सर्जरी की कर दी जाती है जो महिलाएं प्राकृतिक तौर पर डिलीवरी कर सकती है पर उनकी सर्जरी से डिलीवरी कर दी जाती है। मरीज भर्ती होता है तो उसके परिजन को कुछ लालची डॉक्टर इस प्रकार डरा देते हैं कि इनको तो भयंकर बीमारी है और अभी के अभी भर्ती नहीं करा तो यह कभी भी उनके साथ बुरा हो सकता है। परिवार वाले हाथ जोड़कर डॉक्टर से यही निवेदन करते हैं कि जैसा आप उचित समझें। यदि ह्रदय रोग का डॉक्टर है तो वह यही कहेगा कि इनको स्टंट लगाना है तो लोकल लगाऊं या बाहर का या इनका बायपास करने का कहेगे। दांत का डॉक्टर है तो वह भी यही पूछेगा कि किस मटेरियल का दांत लगाना है। उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा बिल बनाना है और कारपोरेट हॉस्पिटल में डॉक्टरों को यही कहा जाता है कि मरीज यदि आता है तो उसे यदि कोई छोटी मोटी दूसरी बीमारी भी हो तो भी अपने हॉस्पिटल के दूसरे डॉक्टर से इनको कंसल्ट करवाओ और हर डॉक्टर बार-बार नई जांचे करवायेगा और ज्यादा से ज्यादा समय हॉस्पिटल में एडमिट रखने का सोचेगा ताकि बिल बडता रहे, मरीज का खाना दवाई सब हॉस्पिटल से सप्लाई होगी हर बार डॉक्टर आपसे पूछने आएगा कैसे हो तो उनकी फीस जुडती जाएगी और जितने भी डॉक्टर आएंगे उन सभी की फीस आप के बिल में जोड़ दी जाएगी यहां तक कि डाइटिशियन से लेकर सभी की।
लाखों के बिल बनाना एक प्रथा बन गई है और कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि इनके खिलाफ कोई रोक लगाई जा सके और नाही इनके खिलाफ कोई रिपोर्ट हो सकती है। क्योंकि रिपोर्ट तभी दर्ज होती है जब मेडिकल काउंसिल की सलाह पुलिस मांगती है।

 

 


अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)

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