बेसहारा श्वानों पर सख्ती, कलेक्टर ने दिए बड़े निर्देश
Jhalawar : झालावाड़ जिला मुख्यालय पर आयोजित जिला पशुक्रूरता निवारण समिति की बैठक में पशु कल्याण और संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बेसहारा श्वानों की बढ़ती संख्या, निराश्रित पशुओं की देखभाल और पशुधन प्रबंधन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बैठक में जिला कलेक्टर ने शहर में बढ़ रही बेसहारा श्वानों की समस्या को गंभीर विषय बताते हुए नगर परिषद अधिकारियों को अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्वानों की पहचान कर उन्हें नियमित रूप से पकड़ने और एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) कार्यक्रम के तहत बधियाकरण की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए। साथ ही इसकी निरंतर निगरानी भी सुनिश्चित की जाए ताकि आमजन की सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों को संतुलित रखा जा सके।
पशुधन प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर ने पशुपालन विभाग को जिलेभर के पशुपालकों, गोशालाओं और निराश्रित पशुओं का विस्तृत डाटा तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध पशुधन, गोशालाओं की स्थिति और उनमें संरक्षित पशुओं की संख्या का समेकित विवरण भविष्य की योजनाओं के लिए उपयोगी साबित होगा।
बैठक में पॉलीथीन से पशुओं को होने वाले नुकसान पर भी चिंता व्यक्त की गई। जिला कलेक्टर ने कहा कि सड़कों पर छोड़ी गई प्लास्टिक और पॉलीथीन खाने से गोवंश सहित अन्य पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसके लिए जनजागरूकता अभियान चलाकर कपड़े, जूट और कागज की थैलियों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए।
भीषण गर्मी को देखते हुए पशु-पक्षियों के लिए पेयजल उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने नगर परिषद, ग्राम पंचायतों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से सार्वजनिक स्थानों पर पानी की टंकियां और परिंडे लगाने के निर्देश दिए, ताकि गर्मी के दौरान पशु-पक्षियों को राहत मिल सके।
बैठक के दौरान पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी भी साझा की गई। अधिकारियों ने पशुओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और जनसहभागिता के माध्यम से पशु कल्याण गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहे।