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क्यूबा का अमेरिका पर पलटवार, बोला- तेल रोकने की नीति से संकट गहरा रहा

क्यूबा का अमेरिका पर पलटवार, बोला- तेल रोकने की नीति से संकट गहरा रहा

हवाना। तेल आपूर्ति और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर क्यूबा और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। क्यूबा के विदेश मंत्री Bruno Rodríguez Parrilla ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के उस बयान को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि वाशिंगटन क्यूबा को तेल मिलने से नहीं रोक रहा है।

ब्रूनो रोड्रिग्ज ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिकी प्रशासन की नीतियां वास्तव में क्यूबा तक तेल पहुंचने में बाधा पैदा कर रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा हस्ताक्षरित एक कार्यकारी आदेश का उल्लेख किया, जिसके तहत क्यूबा को तेल उपलब्ध कराने वाले देशों पर दंडात्मक शुल्क लगाए जा सकते हैं।

क्यूबा का तर्क है कि ऐसी नीतियों के कारण कई देश और कंपनियां क्यूबा के साथ ऊर्जा व्यापार करने से बचती हैं, क्योंकि उन्हें अमेरिकी बाजार में व्यापारिक नुकसान का डर रहता है। रोड्रिग्ज ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि तेल सप्लाई करने वालों पर दबाव बनाया जा रहा है, तो इसे तेल आपूर्ति रोकने की कोशिश क्यों नहीं माना जाना चाहिए।

यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी सीनेट में हुई सुनवाई के दौरान मार्को रुबियो ने क्यूबा की ऊर्जा स्थिति पर अमेरिकी नीति का बचाव किया। उन्होंने कहा था कि अमेरिका सीधे तौर पर क्यूबा को तेल आपूर्ति बाधित नहीं कर रहा है। इसके जवाब में हवाना ने अमेरिकी रुख को भ्रामक बताया।

ऊर्जा के मामले में क्यूबा काफी हद तक आयात पर निर्भर है। रिपोर्टों के अनुसार, देश को अपनी सामान्य जरूरतें पूरी करने के लिए हर महीने कई ईंधन शिपमेंट की आवश्यकता होती है। हालांकि इस वर्ष अब तक उसे सीमित मात्रा में ही कच्चे तेल की आपूर्ति मिल पाई है, जिससे ऊर्जा संकट और गहरा गया है।

विवाद केवल तेल तक सीमित नहीं रहा। क्यूबा ने अमेरिका द्वारा उसे आतंकवाद को कथित समर्थन देने वाले देशों की सूची में बनाए रखने के फैसले की भी आलोचना की है। रोड्रिग्ज ने आरोप लगाया कि यह निर्णय तथ्यों के बजाय राजनीतिक कारणों से प्रेरित है और इसका उद्देश्य क्यूबा पर आर्थिक दबाव बनाए रखना है।

क्यूबा सरकार का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और आर्थिक उपायों का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन पर पड़ रहा है। वहीं वाशिंगटन का मानना है कि उसकी नीतियां राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप हैं।

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